West Asia Crisis: पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ब्रिटिश पीएम कीएर स्टार्मर ने बातचीत की है। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया संघर्ष और सैन्य सहयोग के लेकर चर्चा की है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने रविवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में बताया गया कि दोनों नेताओं के बीच पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अहम चर्चा हुई।
सैन्य सहयोग पर दोनों नेताओं ने की चर्चा
बयान के अनुसार, बातचीत की शुरुआत पश्चिम एशिया की ताजा स्थिति से हुई। दोनों नेताओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि ब्रिटेन और अमेरिका किस तरह मिलकर सैन्य सहयोग कर रहे हैं। इसमें खास तौर पर ब्रिटेन के रॉयल एयर फोर्स (आरएएफ) के एयरबेस का इस्तेमाल शामिल है, जिनका उपयोग क्षेत्र में मौजूद सहयोगी देशों की सामूहिक सुरक्षा और आत्मरक्षा के समर्थन के लिए किया जा रहा है।
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अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने पर स्टार्मर ने जताया दुख
प्रधानमंत्री स्टार्मर ने इस दौरान हाल ही में मारे गए छह अमेरिकी सैनिकों को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी जनता के प्रति गहरी संवेदना भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद दुखद है और ब्रिटेन इस मुश्किल समय में अमेरिका के साथ खड़ा है। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ब्रिटेन के बीच समन्वय और बातचीत जारी रखना बेहद जरूरी है। बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने जल्द ही फिर से बातचीत करने की उम्मीद भी जताई, ताकि क्षेत्र की स्थिति और सुरक्षा सहयोग पर आगे चर्चा की जा सके।
ईरान के नए सर्वोच्च नेता को लेकर ट्रंप का दावा
वहीं ईरान के नए सर्वोच्च नेता को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अगर तेहरान को पहले उनकी मंजूरी नहीं मिलती है, तो ईरान के अगले सर्वोच्च नेता का कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। ये सर्वोच्च नेता युद्ध के पहले दिन हवाई हमले में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई की जगह लेंगे। ट्रंप ने एक न्यूज चैनल से कहा, 'उन्हें हमसे मंजूरी लेनी ही होगी। अगर उन्हें हमसे मंजूरी नहीं मिलती है, तो उनका कार्यकाल ज्यादा लंबा नहीं चलेगा।' डोनाल्ड ट्रंप की ये टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सर्वोच्च नेता का चुनाव करने के लिए जिम्मेदार ईरानी धार्मिक नेताओं की परिषद ने मतदान कर लिया है और जल्द ही एक नाम की घोषणा करने वाली है।