ग्रेजुएट रूट वीजा क्या है?
ग्रेजुएट रूट वीजा के तहत ब्रिटेन से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्र देश में काम करने, रहने या काम की तलाश करने के आवेदन कर सकते हैं। ये अंतरराष्ट्रीय छात्र दो साल तक ब्रिटेन में रहने के लिए आवेदन कर सकते हैं। जबकि, पीएचडी करने वाले छात्र तीन साल तक रहने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
गृह मंत्रालय के औपचारिक एलान का इंतजार: एमएसी
आव्रजन सलाहकार समिति (एमएसी) ने कहा कि वह गृह मंत्री जेम्स क्लेवरली द्वारा पिछले हफ्ते संसद में की गई एक घोषणा के बाद गृह मंत्रालय से इस औपचारिक एलान का इंतजार कर रही है कि ग्रेजुएट रूट वीजा की समीक्षा की जाएगी, ताकि इसके दुरुपयोग को रोका जा सके और ब्रिटेन में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता की रक्षा की जा सके। यह समिति (एमएसी) ब्रिटेन सरकार को उसकी वीजा नीतियों पर सलाह देती है।
42 फीसदी भारतीय छात्रों को ग्रेजुएट रूट वीजा
ग्रेजुएट रूट वीजा को जुलाई 2021 में तत्कालीन गृहमंत्री प्रीति पटेल के द्वारा लागू किया गया था। इसलिए, 176,000 अंतरराष्ट्रीय छात्रों को जारी किए गए ग्रेजुएट रूट वीजा में 42 फीसदी भारतीय नागरिक हैं। इसका मतलब है कि इस श्रेणी में किसी भी तरह के बदलाव का भारतीय छात्रों पर काफी असर पड़ेगा।
एमएसी के प्रमुख ने क्या कहा?
समिति के प्रमुख प्रोफेसर ब्रायन बेल ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, मैं इस बात में नहीं पड़ना चाहता हूं कि वे (गृह मंत्रालय) हमसे क्या देखने के लिए कहने जा रहे हैं। लेकिन, उनके पास (ग्रेजुएट रूट वीजा की समीक्षा के लिए) कई विकल्प हैं। आप कौन से विश्वविद्यालय गए और कौन से पाठ्यक्रम से पढ़ाई की। निश्चित रूप से हम समग्र समीक्षा में इस पर विचार करेंगे।
प्रवासी छात्र समूहों ने जताई थी चिंता
प्रवासी छात्र समूहों ने पहले ही वीजा श्रेणी में इस तरह की व्यापक समीक्षा के बारे में चिंता जताई थी। भारतीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन एक महत्वपूर्ण गंतव्य माना जाता है। ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों के पूर्व मंत्री लॉर्ड जो जॉनसन ने कहा, मुझे लगता है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है कि ग्रेजुएट रूट वीजा की समीक्षा में ब्रिटेन में अध्ययन के बाद काम में उनकी भूमिका पर सवाल उठाने के बजाय रूट वीजा के किसी भी दुरुपयोग पर केंद्रित हो।