ब्रिटेन में नौ साल के एक हिंदू बच्चे को माथे पर तिलक लगाकर स्कूल आने से रोकने का मामला सामने आया है। यह विवाद लंदन के विकर्स ग्रीन प्राइमरी स्कूल से जुड़ा है। बच्चा स्वामीनारायण संप्रदाय को मानता है और 2021 से इस स्कूल में पढ़ रहा था। वह कई वर्षों से माथे पर धार्मिक पहचान के तौर पर तिलक चंदलो लगाकर स्कूल जाता था। हालांकि, 2025 के आखिर में स्कूल ने इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद विवाद बढ़ा और आखिरकार माता-पिता ने बच्चे को स्कूल से निकाल लिया। अब परिवार ने इस मामले में ब्रिटेन के हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
माता-पिता ने स्कूल पर क्या आरोप लगाए?
बच्चे के माता-पिता का कहना है कि उनके बेटे को केवल अपनी धार्मिक परंपरा का पालन करने की वजह से परेशानी झेलनी पड़ी। परिवार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अपने बेटे को सिर्फ आस्था का पालन करने के कारण इस तरह की स्थिति से गुजरते देखना उनके लिए बेहद दुखद था। माता-पिता के मुताबिक, बच्चा कई वर्षों से बिना किसी परेशानी के तिलक चंदलो लगाकर स्कूल जाता था।
उन्होंने कहा कि उनके बेटे की धार्मिक पहचान से किसी को नुकसान नहीं पहुंचता था और न ही इससे उसकी पढ़ाई या स्कूल की गतिविधियों पर कोई असर पड़ता था। परिवार ने कहा कि वे अपने बच्चों को सभी धर्मों का सम्मान करना सिखाते हैं और चाहते हैं कि उनके धर्म के प्रति भी वैसा ही सम्मान दिखाया जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि किसी दूसरे बच्चे को अपनी पढ़ाई और धर्म में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न होना पड़े।
परिवार ने हाईकोर्ट में क्या कानूनी मांग रखी है?
इस मामले में परिवार की ओर से अश्रे लॉ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। कानूनी टीम ने ब्रिटेन के इक्वैलिटी एक्ट 2010 के तहत धार्मिक भेदभाव और ह्यूमन राइट्स एक्ट 1998 के तहत मिले अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। इंग्लैंड और वेल्स के हाईकोर्ट में दायर याचिका में परिवार ने 25 हजार पाउंड के हर्जाने की मांग की है। हालांकि, मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और लगाए गए आरोपों पर विवाद बना हुआ है। अश्रे लॉ के निदेशक अम्ब्रिश लिम्बाचिया ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक बच्चे या एक स्कूल तक सीमित नहीं है। इससे ब्रिटेन की शिक्षा व्यवस्था में धार्मिक स्वतंत्रता और समानता से जुड़े बड़े सवाल उठते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कानूनी कार्रवाई से अलग-अलग धर्मों के बच्चों के अधिकारों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।
स्कूल ने अपने बचाव में क्या कहा?
स्कूल ने परिवार की ओर से लगाए गए भेदभाव के आरोपों को खारिज किया है। विकर्स ग्रीन प्राइमरी स्कूल का कहना है कि उसने परिवार की धार्मिक मान्यताओं को समझते हुए संवेदनशीलता के साथ काम किया और वैकल्पिक व्यवस्था की पेशकश भी की थी, लेकिन माता-पिता ने उसे स्वीकार नहीं किया। स्कूल ने यह भी कहा कि वह अपने समुदाय में अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों का सम्मान करता है। उसके मुताबिक, स्कूल की नीति का उद्देश्य आपसी मेलजोल, निष्पक्षता, समानता और सभी के साथ अपनापन बनाए रखना है। साथ ही, स्कूल समुदाय में किसी तरह के बंटवारे या व्यवधान को रोकना भी इस नीति का हिस्सा है।
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हिंदू धार्मिक परंपरा में तिलक चंदलो का क्या महत्व है?
तिलक चंदलो स्वामीनारायण संप्रदाय को मानने वाले लोगों की धार्मिक पहचान का प्रतीक है। इसे आमतौर पर चंदन के लेप से अंग्रेजी के अक्षर 'U' के आकार में बनाया जाता है और बीच में कुमकुम का छोटा लाल निशान लगाया जाता है। यह भगवान के प्रति भक्ति और विनम्रता का प्रतीक माना जाता है। परिवार का आरोप है कि स्कूल की आपत्ति के बाद बच्चे से उसके धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर बार-बार सवाल किए गए और उसे स्कूल की कुछ गतिविधियों में हिस्सा लेने से भी रोका गया।
इस कानूनी लड़ाई में परिवार को एक अंतरधार्मिक पहल 'एक्शन फॉर हार्मनी' का भी समर्थन मिला है। इसके प्रमुख नितिन पलान ने कहा कि धार्मिक समानता का अधिकार हिंदू बच्चों को भी मिलना चाहिए और उनकी परंपराएं उनकी पहचान का अहम हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद किसी तरह का विभाजन पैदा करना नहीं, बल्कि सभी के लिए समझ, निष्पक्षता और समान व्यवहार को बढ़ावा देना है।