सार
ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स में चार भारतीय मूल के नए सदस्य शामिल होंगे। इनमें प्रोफेसर गीता नर्गुंड, उदय नगराजु, नीना गिल और पूर्व यूरोपीय संसद सदस्य शमा टैटलर का नाम शामिल है। आइए इन चारों सदस्यों के बारे में जानते हैं।
ब्रिटेन में अगले साल हाउस ऑफ लॉर्ड्स में चार भारतीय मूल के नए सदस्य शामिल होंगे। इसमें सुप्रसिद्ध फर्टिलिटी विशेषज्ञ प्रोफेसर गीता नर्गुंड, टेक्नोलॉजी उद्यमी उदय नगराजु, पूर्व यूरोपीय संसद सदस्य नीना गिल, और ब्रेंट, लंदन की पार्षद शमा टैटलर शामिल हैं। इन्हें प्रधानमंत्री किएर स्टार्मर ने लेबर पार्टी के पक्ष से सदस्यता के लिए नामांकित किया है। नियुक्ति की औपचारिक पुष्टि किंग चार्ल्स III ने की। आइए हाउस ऑफ लॉर्ड्स में शामिल हुए चारों भारतीय सदस्यों के बारे में जानते हैं।
क्रिएट फर्टिलिटी का संस्थापक हैं गीता नर्गुड
सबसे पहले बात अगर प्रोफेसर गीता नर्गुड की करें तो, वह क्रिएट फर्टिलिटी की संस्थापक और महिलाओं की स्वास्थ्य विशेषज्ञ हैं। उन्होंने वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य असमानताओं को कम करने और प्रजनन स्वास्थ्य तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अपना करियर समर्पित किया है।
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उदय नगराजु ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में किया है नाम
वहीं उदय नगराजु टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में विशेषज्ञ हैं। उन्होंने एआई नीति प्रयोगशालाएं की स्थापना की और ब्रिटिश भारतीय युवाओं के लिए महात्मा गांधी भविष्य के नेता कार्यक्रम चलाया। ऐसे में उनका नया प्रोजेक्ट एआईपीएल नोवा संगठनों को एआई के अवसरों और चुनौतियों से निपटने में मदद करेगा।
नीना गिल को मिल चुका है सीबीई सम्मान
लुधियाना में जन्मी पूर्व यूरोपीय संसद सदस्य नीना गिल, जिन्हें ब्रिटेन में समाज सेवा के लिए सीबीई सम्मान मिला है 10 साल की उम्र में ब्रिटेन आईं थी। यूरोपीय संसद में उन्होंने वित्तीय नियमों और डिजिटल कंटेंट से जुड़े कई कानूनों को आगे बढ़ाया। वे सिख फॉर लेबर की अध्यक्ष भी रही हैं।
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ब्रिटिश भारतीय नेताओं में उभरती हुई स्टार मानी जाती है शमा
वहीं चौथी सदस्य के रूप में शामिल हुईं, शमा टैटलर लेबर पार्टी में युवा ब्रिटिश भारतीय नेताओं में उभरती हुई स्टार मानी जाती हैं। वह श्रम भारतीय प्रवासी समूह की उपाध्यक्ष हैं और पहली जैन महिला हैं जो ब्रिटिश संसद में सेवा करेंगी। बता दें कि चारों भारतीय मूल के सदस्य लेबर पार्टी की 25 नामांकनों में शामिल हैं। इसका उद्देश्य हाउस ऑफ लॉर्ड्स में कंजरवेटिव पार्टी की बहुमत शक्ति को संतुलित करना है। इस कदम के साथ ही लेबर सरकार हाउस ऑफ लॉर्ड्स से विरासत में मिली सीटों को हटाने के अपने वादे की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।
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