छह पश्चिमी देशों ने वेस्ट बैंक में हिंसा फैलाने वाले इस्राइली सेटलर्स पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। इसमें इस्राइल के वित्त मंत्री पर फ्रांस जाने की रोक और कई संगठनों के बैंक खाते फ्रीज करना शामिल है। इस्राइल ने इस पूरी कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है।
वेस्ट बैंक में फलस्तीनियों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं। इस हिंसा को लेकर दुनिया के छह बड़े देश बहुत गुस्से में हैं। इन देशों ने मिलकर हिंसक इस्राइली सेटलर्स पर नए और कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। इस कार्रवाई में इस्राइल के एक बड़े कैबिनेट मंत्री को भी निशाना बनाया गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस कदम से इस्राइल पर दबाव बनाना चाहता है, ताकि वहां तुरंत हिंसा रोकी जा सके।
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छह देशों की बड़ी घेराबंदी
इस कार्रवाई में ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, नॉर्वे और न्यूजीलैंड शामिल हैं। इन छह देशों के विदेश मंत्रियों ने एक साझा बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि चरमपंथी सेटलर्स लगातार फलस्तीनियों पर हमले कर रहे हैं। उनके मानवाधिकारों का खुलेआम हनन हो रहा है। इन हिंसक लोगों को इस्राइल सरकार का पूरा समर्थन मिल रहा है। ये लोग बिना किसी डर के काम कर रहे हैं। सरकार की मदद से वहां नई बस्तियां बनाई जा रही हैं, जो पूरी तरह गलत है।
फ्रांस और ब्रिटेन का कड़ा एक्शन
फ्रांस ने इस्राइल के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच के अपने देश में आने पर रोक लगा दी है। फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा कि स्मोट्रिच बस्तियों के विस्तार को बढ़ावा दे रहे हैं। वे फलस्तीनी गांवों को खाली करा रहे हैं। फ्रांस ने इसके साथ ही चार बड़े नेताओं और 21 हिंसक सेटलर्स पर भी पाबंदी लगाई है। दूसरी तरफ, ब्रिटेन ने भी बड़ा कदम उठाया है। ब्रिटेन ने बस्तियों को पैसा देने वाले छह संगठनों पर वित्तीय प्रतिबंध लगा दिए हैं। अब ये संगठन पैसों का लेन-देन नहीं कर पाएंगे।
इस्राइल ने जताया कड़ा विरोध
इस्राइल सरकार इस फैसले से बेहद नाराज है। इस्राइल के विदेश मंत्रालय ने इन प्रतिबंधों को अपमानजनक बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के कदमों से दुनिया में यहूदी विरोधी भावना बढ़ेगी। फ्रांस में इस्राइल के राजदूत जोशुआ जरका ने भी इस पर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि सरकार से जुड़े लोगों पर प्रतिबंध लगाने से कोई फायदा नहीं होगा। यह कदम उल्टा पड़ेगा और इससे कट्टरपंथियों को और बढ़ावा मिलेगा।