नासा ने आर्टेमिस III मिशन के लिए चार अंतरिक्ष यात्रियों के नामों का एलान कर दिया है, जो 2027 में पृथ्वी की कक्षा में रहकर लूनर लैंडर डॉकिंग का दो हफ्ते का परीक्षण करेंगे। एलन मस्क और जेफ बेजोस की कंपनियों के बीच लैंडर बनाने की होड़ है, जिसका अंतिम लक्ष्य 2028 में मानव को चांद पर उतारना और भविष्य में मंगल पर जाना है।
अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस III मिशन के लिए यात्रियों के नामों की घोषणा कर दी है। यह मिशन इंसानों को दोबारा चांद पर उतारने की दिशा में नासा का एक बेहद अहम कदम है। यह एलान आर्टेमिस II मिशन की ऐतिहासिक कामयाबी के ठीक दो महीने बाद किया गया है। बता दें कि आर्टेमिस II ने हाल ही में चंद्रमा का चक्कर लगाकर अपोलो 13 का सबसे लंबी दूरी का रिकॉर्ड तोड़ा था।
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धरती की कक्षा में परीक्षा
आर्टेमिस III मिशन के तहत चुने गए अंतरिक्ष यात्री सीधे चांद पर नहीं जाएंगे। नासा के रैंडी ब्रेसनिक, फ्रैंक रुबियो, आंद्रे डगलस और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के लुका परमितानो इस बार चांद की सतह पर कदम नहीं रखेंगे। इसके बजाय, यह क्रू दो सप्ताह तक पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगाएगा। इस दौरान ये अंतरिक्ष यात्री अपने ओरियन कैप्सूल को दो कमर्शियल लूनर लैंडर्स के साथ डॉक करने का कड़ा अभ्यास करेंगे। मिशन कमांडर रैंडी ब्रेसनिक ने कहा कि उनकी टीम अंतरिक्ष में इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं मिशन विशेषज्ञ आंद्रे डगलस ने इस चयन पर बेहद खुशी जताई है।
अरबपतियों के बीच होड़
इस पूरे प्रोजेक्ट में दुनिया के दो सबसे बड़े रईसों के बीच कड़ी टक्कर चल रही है। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स और जेफ बेजोस की ब्लू ओरिजिन लूनर लैंडर बनाने की रेस में शामिल हैं। नासा ने इस दो हफ्ते के डेमो मिशन के लिए साल 2027 का लक्ष्य रखा है। हालांकि, जेफ बेजोस की कंपनी ब्लड ओरिजिन को हाल ही में एक बड़ा झटका लगा है। फ्लोरिडा में लॉन्च पैड पर इंजन परीक्षण के दौरान कंपनी का एक विशाल रॉकेट धमाके के साथ उड़ गया। इस धमाके से आसपास के घर हिल गए और आसमान में आग का एक बड़ा गोला दिखाई दिया। इस झटके के बावजूद नासा के जेरेमी पार्सन्स ने भरोसा जताया है कि ब्लू ओरिजिन समय पर रॉकेट तैयार कर लेगी।
मिशन मून से मिशन मार्स
नासा का आर्टेमिस कार्यक्रम 1970 के दशक के बाद पहली बार इंसानों को चांद पर वापस ले जाने की कोशिश है। नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमैन ने हाल ही में इस पूरे कार्यक्रम में कुछ बड़े बदलाव किए हैं। अब इस मिशन को अपोलो युग की तरह ही तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी है। नई योजना के मुताबिक, साल 2027 में पृथ्वी की कक्षा में होने वाले इस परीक्षण के बाद साल 2028 में अंतरिक्ष यात्रियों को सीधे चांद की सतह पर उतारा जाएगा। इसके साथ ही, नासा ने मून बेस बनाने के लिए ब्लू ओरिजिन सहित चार कंपनियों को करोड़ों डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट दिए हैं। जेरेड इसाकमैन के अनुसार, इस मून बेस का असली मकसद भविष्य के मंगल मिशन (मार्स एक्सपीडिशन) की नींव रखना है।