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स्वतंत्रता का नेटवर्क:  ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज ट्रस ने कहा, भारत के साथ अपने संबंध और बढ़ाना चाहते हैं

Thu, 28 Apr 2022 05:35 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

लिज ट्रस ने कहा कि वैश्विक स्थिरता के लिए नाटो, जी7 और राष्ट्रमंडल जैसी भागीदारियां बहुत आवश्यक हैं। हम भारत, जापान और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ अपने संबंध और मजबूत करना चाहते हैं।
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ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज ट्रस - फोटो : twitter/trussliz
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विस्तार
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ब्रिटेन की विदेश मंत्री लिज ट्रस ने लंदन में एक प्रमुख विदेश नीति संबोधन में कहा कि ब्रिटेन अपने सहयोगियों के साथ स्वतंत्रता के एक नेटवर्क का निर्माण करने के लिए भारत के साथ अपने संबंधों को और बढ़ाना चाहता है। ट्रस ने बुधवार को लॉर्ड मेयर के ईस्टर भोज में अपने मुख्य संबोधन के दौरान रूस और चीन को अपने आक्रामक रुख पर कड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा कि ब्रिटेन अल्पकालिक लाभ के स्थान पर पर संप्रभुता के लिए सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता देता है।

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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यूक्रेन का इस युद्ध में जीतना पश्चिम के लिए एक सामरिक अनिवार्यता है। ट्रस ने कहा, 'हमारी समृद्धता और सुरक्षा हर हालत में मजबूत भागीदारी के नेटवर्क पर बनी होनी चाहिए। इसी को मैंने स्वतंत्रता के नेटवर्क के रूप में बताया है।' उन्होंने कहा कि ऐसी दुनिया में जहां दुर्भावनापूर्ण तत्व बहुपक्षीय संस्थानों को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं, द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समूह बड़ी भूमिका निभाएंगे।

लिज ट्रस ने आगे कहा कि नाटो (उत्तर अटलांटिक संधि संगठन), जी7 और राष्ट्रमंडल जैसी भागीदारियां बहुत आवश्यक हैं। हम भारत, जापान और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ अपने संबंध और मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमें उन मजबूत मूल्यों पर काम करना चाहिए जो जी7 में हमारे पास हैं। पिछले साल जी7 में ब्रिटेन के अध्यक्षरहने के दौरान मैं ऑस्ट्रेलिया, कोरिया, भारत, दक्षिण अफ्रीका और आसियान को इसमें मेज पर लेकर आई थी और ऐसा करना बहुत महत्वपूर्ण था।
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इस दौरान उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के युद्ध प्रयासों के लिए फंडिंग को रोकने के लिए ब्रिटिश सरकार की ओर से उठाए गए मानकों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम यह दिखा रहे हैं कि अब आर्थिक पहुंच आसानी से पाई नहीं जा सकती है, इसे कमाना पड़ता है। देशों को नियमों के अनुसार ही चलना चाहिए और इसमें चीन भी शामिल है। उन्होंने कहा कि चीन ने रूस की आक्रामकता या इसके युद्ध अपराधों की निंदा नहीं की है और न ही विरोध व्यक्त किया है।

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