होप मिशन यूएई के लिए अहम है। यूएई के 450 से ज्यादा इंजीनियर्स और टेक्नीशियंस करीब 6 साल से इस प्रोजेक्ट में जुटे थे। अब तक देश ने सिर्फ 3 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजे हैं, जिनका मकसद इनका पृथ्वी के वायुमंडल में होने वाले बदलावों और इसके असर पर नजर रखना है। इनमें से दो दक्षिण कोरिया ने तैयार किए और रूस ने लॉन्च किए थे। पहली बार है जब यूएई ने देश में तैयार ऑर्बिटर अंतरिक्ष में भेजा है।
जलवायु परिवर्तन की जानकारी जुटाएगा
फरवरी 2021 तक मंगल की कक्षा में पहुंचने के बाद यह आर्बिटर कम से कम दो साल तक लाल ग्रह की कक्षा का चक्कर लगाएगा। इसमें तीन उपकरण मंगल ग्रह के ऊपरी वायुमंडल का अध्ययन करेंगे और जलवायु परिवर्तन के बारे में जानकारी जुटाएंगे। यूएई ने कहा कि यह पहली बार अलग-अलग मौसम में मंगल के वायुमंडल की पूरी तस्वीर सामने रखेगा।
पहली बार यूएई ने अंतरिक्ष मिशन की कमान महिला वैज्ञानिक सारा अल अमीरी को सौंपी है। सारा ने बताया कि इस मिशन की लांचिंग के शुरुआती 24 घंटे में वह खुद इस पर नजर रखेंगी। इसी समय उन्हें मिशन की सफलता से जुड़े शुरुआती नतीजे मिलेंगे। सारा ने शारजाह की अमेरिकन यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में डिग्री ली है।
अमेरिका, रूस, यूरोप, भारत के बाद बड़ा कदम
यूएई के पास अंतरिक्ष यानों को निर्माण और डिजाइनिंग का बेहद ही मामूली अनुभव है लेकिन इसके बावजूद उसने ऐसा संकल्प लिया जिसमें अब तक सिर्फ अमेरिका, रूस, यूरोप और भारत को कामयाबी मिली है। इसका एक बड़ा कारण अरब जगत में प्रेरणा का स्रोत बनना है और दूसरे यह पता लगाना है कि मंगल ग्रह पर आखिर ऐसा क्या हुआ जो वहां हवा और पानी दोनों खत्म हो गए।
दुबई में भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने इस उपलब्धि के लिए यूएई को बधाई दी। दूतावास ने ट्वीट कर कहा, यूएई में रहने वाले भारतीयों की ओर से हम अमीरात के मित्रों को होप के सफल परीक्षण के लिए बधाई देते हैं और कोविड-19 के इस मुश्किल दौर में भी वैज्ञानिकों की अडिग प्रतिबद्धता को सलाम करते हैं।