विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त अरब अमीरात में इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) में विदेश मंत्रियों की बैठक के उद्घाटन सत्र को सम्मानित अतिथि के रूप में संबोधित किया। स्वराज ने बैठक को संबोधित करते हुए आतंकवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद दुनिया के लिए बड़ा खतरा है। आतंकवाद लोगों का जीवन बर्बाद कर रहा है और क्षेत्रों को अस्थिर कर रहा है। आतंकवाद दुनिया को जोखिम में डाल रहा है और इसकी पहुंच बढ़ रही है। यह पहली बार है जब भारत इस अहम बैठक में हिस्सा ले रहा है। वहीं पाकिस्तान इसमें शामिल नहीं है।
सुषमा स्वराज ने शुक्रवार को अबू धाबी में दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के शुरुआती पूर्ण बैठक में शामिल हुईं। यह ओआईसी की 46वीं बैठक है। बैठक को संबोधित करने के लिए स्वराज को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने आमंत्रित किया।
इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) 57 देशों का प्रभावशाली समूह है। संयुक्त राष्ट्र के बाद यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा संगठन है। ओआईसी सदस्य देशों में रहनेवाले लोगों की कुल आबादी साल 2018 मे 1.9 खरब थी।
यह पहली बार है जब भारत को ओआईसी बैठक में आमंत्रित किया गया है। भारत न तो इस समूह का सदस्य है और न ही पर्यवेक्षक देश। जबकि मुस्लमानों की आबादी के मामले में दुनिया में इसका तीसरी स्थान है। रूस और थाइलैंड जैसे देश जहां अल्पसंख्यक मुस्लमानों की अच्छी खासी आबादी है, ओआईसी के पर्यवेक्षक हैं।
पचास साल पहले 1969 में इंदिरा गांधी कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्री फखरुद्दीन अली अहमद को सऊदी अरब की सलाह पर समूह की पहली बैठक में आमंत्रित किया गया था। लेकिन पाकिस्तान की आपत्ति के बाद उनका आमंत्रण वापस ले लिया गया और प्रतिनिधिमंडल को बीच रास्ते से लौटना पड़ा था।