इराक में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद भारत ने इन हमलों पर सीधी प्रतिक्रिया देने से बचते हुए अपने नागरिकों को सुरक्षा को ध्यान में रखने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय द्वारा जारी परामर्श में इराक में रहने वाले भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और वहां की यात्रा करने से बचने का सुझाव दिया गया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, बगदाद में हमारा उच्चायोग और इरबिल में वाणिज्य दूतावास सामान्य रूप से काम करना जारी रखेंगे और इराक में रहने वाले भारतीय नागरिकों को सभी सेवाएं प्रदान करेंगे।
मंत्रालय के अलावा नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने भारतीय एयरलाइन कंपनियों से कहा कि वे ईरान, इराक, ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी में हवाई क्षेत्र में पूरी सतर्कता बरतें। डीजीसीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि, हमने संबद्ध एयरलाइनों के साथ बैठक की और उन्हें सतर्क रहने तथा हर संभव एहतियात बरतने को कहा गया है।
अमेरिका-ईरान में तनाव से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है, मगर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र्र प्रधान ने बुधवार को कहा, देश में तेल का कोई संकट नहीं है। हम हर तरह के हालात से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इस बारे में ज्यादा विवरण नहीं दिया। भारत दुनिया का तीसरा सबसे ज्यादा ईंधन खपत करने वाला देश है।
प्रधान ने कहा, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मामले में बडे़ तेल आपूर्तिकर्ता देशों में अपने समकक्षों से बातचीत की है और पिछले सप्ताह से जारी वैश्विक हालात को लेकर भारत की चिंता से उन्हें अवगत करा दिया है। उन्होंने कहा, हालात पर हम पैनी नजर बनाए हुए हैं।
फ्रांसीसी विमानन कंपनी एयर फ्रांस ने कहा कि अगले नोटिस तक ईरान और इराक के लिए अपनी विमान सेवाओं को स्थगित कर रहा है। यह कदम सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है।
पाक ने भी नागरिकों को किया सतर्क
पाकिस्तान ने कहा है कि वह अपने नागरिकों को आगाह करना चाहेगा कि वे अगर ईरान या इराक जाना चाह रहे हों तो पूरी तरह से सतर्क रहें और जो पहले से इराक में हैं वे बगदाद में बने पाक दूतावास के संपर्क में रहें।
इराक के प्रधानमंत्री कार्यालय ने बुधवार को दावा किया कि उसे ईरान की तरफ से एक आधिकारिक मौखिक संदेश मिला था जिसमें कहा गया था कि इराक की जमीन पर तैनात अमेरिकी सेनाओं पर मिसाइल से हमला जल्द हो सकता है। कार्यालय ने कहा कि संदेश में कहा गया था कि सुलेमानी की हत्या के जवाब में यह कदम उठाया जाएगा और यह हमला केवल अमेरिकी सेना तक ही सीमित रहेगा। हालांकि यह नहीं बताया गया था कि हमला कहां किया जाएगा।