ईरान में बुधवार को पूर्व सैन्य अधिकारी कासिम सुलेमानी की कब्र पर दो जबरदस्त धमाके हुए, जिनमें 103 लोगों की मौत हो गई, जबकि 188 लोग घायल हुए हैं। सुलेमानी ईरानी रिवोल्युशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के मेजर जनरल और कुद्स फोर्स के कमांडर थे। 3 जनवरी, 2020 को एक अमेरिकी ड्रोन हमले में बगदाद में उनकी मौत हुई। रान के उप गवर्नर ने अमेरिकी ड्रोन हमले में चार साल पहले मारे गए जनरल के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में धमाके और 100 से ज्यादा लोगों की मौत की घटना को आतंकवादी हमला करार दिया है।
ईरान के दक्षिण पूर्वी शहर केरमान में उनकी कब्र पर हर वर्ष 3 से 7 जनवरी के दौरान मातम मनाया जाता है। इस दौरान उनके प्रशंसकों की यहां भारी भीड़ जुटती है। सुलेमानी ईरान के लोकप्रिय सैन्य अधिकारियों में शामिल थे। 2020 में भी जब उनको दफन किया गया था, तो भगदड़ मच गई थी और इस घटना में 50 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। ईरान के सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक यह आतंकी हमला था। ईरान की आपातकालीन सेवाओं के प्रवक्ता बाबाक येक्तापरस्त ने कहा कि 103 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है 188 घायलों में कई गंभीर हैं।
हर तरफ चीख-पुकार मच गई
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, पहला धमाका साहेब अल-जमान मस्जिद के पास हुआ। इसके थोड़ी देर बाद ही दूसरा विस्फोट भी हुआ। धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। घटनास्थल पर धुएं का अंबार देखा गया। थोड़ी ही देर में इलाका मृतकों और घायलों से पट गया। हर तरफ चीख-पुकार मच गई। यह वही जगह है, जहां कासिम सुलेमानी को दफनाया गया था।
भगदड़ में भी कई लोग घायल हुए
दावा किया गया कि कासिम सोलेमानी की कब्र के पास धमाके हुए। हालांकि, विस्फोट के कारण के बारे में कोई जानकारी सामने नहीं आई है। विस्फोटों के बाद मची भगदड़ में भी कई लोग घायल हुए हैं। बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इराक-सीरिया में अल-कायदा, तालिबान सफाये में थी भूमिका
ईरान के सबसे शक्तिशाली लोगों में शामिल रहे सुलेमानी साधारण सैनिक के तौर पर रिवोल्युशनरी गार्ड्स के कुद्स फोर्स में शामिल हुए और इसके प्रमुख बने। यह इकाई है ईरान के लिए विदेशी अभियानों को संभालती है। अमेरिका इसे आतंकी संगठन मानता है। हालांकि, 9/11 हमले के बाद सुलेमानी ने अल-कायदा और तालिबान को खत्म करने के लिए अमेरिका की मदद की थी। इसके अलावा सुलेमानी ने इराक और सीरिया से इस्लामिक स्टेट के सफाये में भी अहम भूमिका निभाई थी। हालांकि, आतंकी संगठन हिज्बुल्ला के जरिये इस्राइल की घेराबंदी के चलते अमेरिका ने ही उन्हें ड्रोन हमले में मार गिराया।
किसी ने नहीं ली जिम्मेदारी
ईरान के अर्ध-आधिकारिक मीडिया हाउस नॉरन्यूज के मुताबिक, सुलेमानी को दफनाए जाने वाले कब्रिस्तान की ओर जाने वाली सड़क पर कई गैस सिलिंडर में विस्फोट हुआ था। अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।