तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन ने तुर्किये की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली स्टील डोम का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि ये प्रणालियां तुर्किये की ताकत को दिखाती हैं। वायु रक्षा के क्षेत्र में हम एक नए दौर की शुरुआत कर रहे हैं। परियोजना के मौजूदा चरण में 47 वाहन शामिल किए गए हैं, जिनकी कीमत लगभग 46 करोड़ अमेरिकी डॉलर है।
तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन ने बुधवार को तुर्किये की एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली स्टील डोम का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह देश और उसके रक्षा उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण है।
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राष्ट्रपति अर्दोआन ने अंकारा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, 'ये प्रणालियां तुर्किये की ताकत को दिखाती हैं। वायु रक्षा के क्षेत्र में हम एक नए दौर की शुरुआत कर रहे हैं।' अर्दोआन सरकार ने पिछले साल अगस्त में स्टील डोम के विकास की शुरुआत की घोषणा की थी। स्टील डोम समुद्र और जमीन पर तैनात वायु रक्षा प्रणालियों और रडारों को एक नेटवर्क में जोड़ता है ताकि तुर्किये के आकाश को सुरक्षित किया जा सके।
परियोजना के मौजूदा चरण में 47 वाहन शामिल
अर्दोआन ने बताया कि परियोजना के मौजूदा चरण में 47 वाहन शामिल किए गए हैं, जिनकी कीमत लगभग 46 करोड़ अमेरिकी डॉलर है। उन्होंने कहा, 'ये हमारे दोस्तों को भरोसा देंगे और दुश्मनों में डर पैदा करेंगे।' अर्दोआन ने कहा कि अगर कोई देश अपनी रडार और वायु रक्षा प्रणाली खुद विकसित नहीं कर सकता, तो वह मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों, खासकर हमारे क्षेत्र की परिस्थितियों में, सुरक्षित भविष्य की गारंटी नहीं दे सकता। हालांकि सरकार ने अभी यह नहीं बताया कि यह प्रणाली पूरी तरह कब काम करने लगेगी।
2019 में रूस से खरीदी थी S-400 मिसाइल प्रणाली
इससे पहले तुर्किये ने 2019 में रूस से S-400 मिसाइल प्रणाली खरीदकर अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने की कोशिश की थी। लेकिन इस वजह से उसे अमेरिका के F-35 स्टील्थ जेट कार्यक्रम से बाहर कर दिया गया। यह तुर्किये के रक्षा लक्ष्यों के लिए एक झटका था। सीरिया और यूक्रेन युद्ध और हाल ही में ईरान पर इस्राइली हमलों ने तुर्किये के लिए वायु रक्षा को और मजबूत करने की जरूरत बढ़ा दी है।
अर्दोआन ने नई उत्पादन सुविधाओं का भी उद्घाटन किया
राष्ट्रपति अर्दोआन ने असेलसन में नई उत्पादन सुविधाओं का भी उद्घाटन किया, जो 2026 में शुरू होंगी। उन्होंने कहा, 'अगले 50 वर्षों में तुर्किये सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी नहीं करेगा, बल्कि अपनी तकनीक के साथ दुनिया का नेतृत्व भी करेगा।' दरअसल, तुर्किये 1974 में साइप्रस पर हमले के बाद अमेरिका द्वारा लगाए गए हथियार प्रतिबंध के बाद से ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है और इसी वजह से उसने अपने रक्षा उद्योग में भारी निवेश किया है।