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ट्रंप ने ऐसा क्या लिखा चिट्ठी में कि अर्दोआन ने उसे रद्दी में फेंक दिया

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डोनाल्ड ट्रंप की चिट्ठी - फोटो : File
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सीरिया से अमेरिकी फौज की वापसी के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने 9 अक्तूबर को तुर्की के राष्ट्रपति को जो सरकारी चिट्ठी भेजी उसमें ये लिखा था - ज्यादा सख्त मत बनिए। बेवकूफी मत करिए। ट्रंप ने ये चिट्ठी तुर्की को ये अनुरोध करने के लिए लिखी थी कि वो उत्तरी सीरिया में कुर्दों की अगुआई वाली सेना के खिलाफ सैन्य कार्रवाई ना करे।

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मगर बीबीसी को जानकारी मिली है कि राष्ट्रपति अर्दोआन ने उनकी इस चिट्ठी को रद्दी में डाल दिया और हमले का आदेश दे दिया। अमेरिका ने पिछले दिनों सीरिया से अपने सैनिकों को हटाने का एलान किया था जिसके बाद उसकी ये कहते हुए तीखी आलोचना हुई कि इससे तुर्की को सैन्य कार्रवाई के लिए हरी झंडी मिल जाएगी।

वैसे बाद में अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस तुर्की पहुंचे और आखिरकार तुर्की युद्धविराम के लिए तैयार हो गया। माइक पेंस ने कहा कि अगले पांच दिनों तक लड़ाई बंद रहेगी और अमेरिका कुर्द सैनिकों को पीछे हटने में मदद करेगा।

क्या लिखा ट्रंप ने

डोनल्ड ट्रंप ने तुर्की को जो चिट्ठी लिखी उसे सबसे पहले अमेरिकी चैनल फॉक्स न्यूज ने जारी की थी। इसमें उन्होंने लिखा, "आइए एक अच्छे समझौते की कोशिश करें। आप हजारों लोगों के जिबह होने के जिम्मेदार नहीं होना चाहते, और ना ही मैं तुर्की की अर्थव्यवस्था को तबाह करने का जिम्मेदार बनना चाहूँगा - जो कि मैं करूंगा।"

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"इतिहास आपको उदारता से देखेगा अगर आपने चीजें सही और मानवीय तरीक़े से दुरुस्त कीं। लेकिन अगर अच्छा नहीं हुआ तो वो आपको हमेशा एक दानव की तरह देखेगा। सख्त मत बनिए। बेवकूफी मत करिए। मैं आपको बाद में फोन करूंगा।"

इस चिट्ठी के बाद तुर्की में क्या प्रतिक्रिया हुई ये जानने के लिए जब बीबीसी तुर्की सेवा ने तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय से संपर्क किया तो उन्हें ये बताया गया - राष्ट्रपति अर्दोआन ने चिट्टी प्राप्त की, उसे सिरे से खारिज किया और रद्दी में फेंक दिया। और तुर्की ने ठीक उसी दिन सीरिया में हमला बोल दिया।

क्या है मुश्किल

इस घटना पर बीबीसी के मध्य पूर्व मामलों के संपादक जेरेमी बोवेन का कहना है कि ये कल्पना करना कठिन है कि कोई राष्ट्रपति ऐसी भी चिट्ठी लिख सकता है। जेरेमी बोवेन के अनुसार अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस्लामिक स्टेट चरमपंथियों का मुक़ाबला करने के लिए सीरिया के कुर्दों का साथ लेने का फैसला किया था।

उसी समय ये लगने लगा था कि ओबामा का सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्स (एसडीएफ) को साथ लेने का ये समीकरण आगे चलकर मुश्किल पैदा कर सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि सीरियाई कुर्द, तुर्की के विद्रोही गुट कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के नजदीकी समझे जाते हैं।

 


तुर्की आरोप लगाता रहा है कि पीकेके एक अलग राज्य बनाने की कोशिश कर रहा है। जबकि पीकेके इससे इनकार करता है। तुर्की मानता है कि पीकेके और एसडीएफ एक ही चरमपंथी गुट के दो हिस्से हैं।

अमेरिका ने पीकेके को पहले ही एक विदेशी चरमपंथी संगठन घोषित किया हुआ है। बुधवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने पीकेके को आतंक के मामले में संभवतः इस्लामिक स्टेट से भी ज्यादा बुरा बताया।

हमला और युद्धविराम

तुर्की ने पिछले सप्ताह सीरियाई इलाके में सैन्य अभियान शुरू कर दिया। उसने ये फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के के सीरिया-तुर्की सीमा क्षेत्र से अपने सैनिकों को हटाने के एलान के बाद किया।

उसका लक्ष्य कुर्दों के एक मिलिशिया गुट - पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स (वाईपीजी) - को खदेड़ना है जिसे तुर्की एक चरमपंथी गुट मानता है। अमेरिका के सहयोगी सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेस (एसडीएफ) में वाईपीजी का ही वर्चस्व है।

सीरिया से पैर समेटने के अमेरिकी राष्ट्रपति के एलान के बाद उनपर सीरिया में एसडीएफ को मझधार में छोड़ने का आरोप लगता है। मगर राष्ट्रपति ट्रंप ने बुधवार को सपाट शब्दों में कह डाला कि कुर्द लोग "फरिश्ता नहीं" हैं।

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उन्होंने साथ ही कहा, "ये हमारी सीमा नहीं है। हमें इसके लिए जान देने की जरूरत नहीं।" वैसे तुर्की सीरिया से लगे तुर्की के इलाक़ों में 20 लाख सीरियाई शरणार्थियों को बसाना चाहता है मगर उसके इस क़दम को लेकर चेतावनी दी जाती है कि इससे स्थानीय कुर्द आबादी का सफाया हो जाएगा।

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