तुर्की के राष्ट्रपति रैचप तैय्यप एर्दोआन (फाइल फोटो)
तुर्की में कमजोर होती अर्थव्यवस्था के बीच अजेय समझे जाने वाले राष्ट्रपति रैचप तैय्यप एर्दोआन को स्थानीय चुनावों में जबरदस्त झटका लगा है। उनकी पार्टी एकेपी को राजधानी अंकारा में हार का सामना करना पड़ा है जबकि विपक्षी दल इस्तांबुल में भी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।
तुर्की में होने वाले मौजूदा स्थानीय चुनावों को एर्दोआन के नेतृत्व के संदर्भ में जनमत संग्रह के बतौर लिया जा रहा है। इस चुनाव में 5.7 करोड़ मतदाताओं ने मेयर और काउंसलरों को चुनने के लिए मतदान किया है।
अंकारा में विपक्षी सेक्युलर रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (सीएचपी) के उम्मीदवार मंसूर यावास ने पर्याप्त मतों से जीत हासिल कर ली है। अंकारा में 25 साल में पहली बार विपक्ष ने जीत हासिल की है। जबकि इस्तांबुल में भी सीएचपी प्रत्याशी एक्रेम इमामोग्लू ने 28,000 मतों से जीत का दावा किया है। हालांकि यहां एकेपी के उम्मीदवार और पूर्व पीऐम बिनाली यील्द्रिम ने भी 4000 मतों से आगे रहने की बात कही है।
राष्ट्रपति एर्दोआन अजेय दिख रहे थे, लेकिन इन चुनावों के बाद से उनकी ये छवि बदलने जा रही है। पिछले साल राष्ट्रपति चुनावों में भारी बहुमत से एर्दोआन के जीतने के बाद ये पहला स्थानीय चुनाव हो रहा है। यहां 2002 के बाद से एर्दोआन की पार्टी एकेपी हर साल चुनाव जीतती आ रही है।
इस्तांबुल पर पेंच
कहावत है कि जो इस्तांबुल जीतेगा, वही तुर्की जीतेगा। ऐसे में यहां बराबरी का मुकाबला चल रहा है। हालांकि फिलहाल किसी फैसले पर पहुंचना जल्दबाजी होगी क्योंकि 1.8 करोड़ की आबादी वाले इस्तांबुल में एकेपी और सीएचपी के वोटों का अंतर बहुत कम है। एकेपी उम्मीदवार ने जीत की घोषणा कर दी है लेकिन अभी भी वोटों की गिनती जारी है और यहां पेंच अटका हुआ है।