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'ईरान को गंभीर हो जाना चाहिए, इससे पहले देर हो जाए': ट्रंप ने दी समझौते की धमकी, कहा- पीछे जाने का मौका नहीं

Thu, 26 Mar 2026 04:44 PM IST
Rahul Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि वह जल्द गंभीर होकर फैसला ले, वरना हालात बिगड़ जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि ईरान समझौते के लिए तैयार है, लेकिन सार्वजनिक रूप से इनकार कर रहा है। साथ ही ट्रंप ने नाटो देशों पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने इस संकट में अमेरिका का साथ नहीं दिया, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका के राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान को जल्द गंभीर होकर फैसला लेना होगा, वरना हालात ऐसे हो जाएंगे जहां से वापसी संभव नहीं होगी। ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। इसी के साथ उन्होंने नाटो देशों पर भी निशाना साधा और सहयोग न करने का आरोप लगाया।

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ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि ईरानी वार्ताकार बहुत अलग और अजीब हैं। वे हमसे डील करने के लिए भीख मांग रहे हैं, जो उन्हें करना चाहिए क्योंकि वो सैन्य रूप से खत्म हो चुके हैं और वापसी का कोई मौका उनके पास नहीं है, और फिर भी वे सबके सामने कहते हैं कि वे सिर्फ हमारे प्रस्ताव को देख रहे हैं। उन्हें जल्द ही गंभीर हो जाना चाहिए, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, क्योंकि एक बार ऐसा हो गया, तो पीछे मुड़ना मुमकिन नहीं है, और यह अच्छा नहीं होगा!

ईरान ने बातचीत की संभावना पर मिले-जुले संकेत दिए हैं, जब ऐसी खबरें आईं कि ट्रंप प्रशासन ने इस हफ्ते की शुरुआत में पाकिस्तान के जरिए तेहरान को 15-सूत्रीय संघर्ष विराम योजना पेश की है। सार्वजनिक रूप से, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि तेहरान ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।

युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत नहीं-अब्बास अराघची
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी मीडिया को बताया कि उनकी सरकार ने युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत नहीं की है और न ही उनकी किसी बातचीत की योजना है। हालांकि उन्होंने माना कि यूएस ने दूसरे देशों के जरिए ईरान को संदेश भेजने की कोशिश की थी, उन्होंने कहा कि यह "न तो बातचीत थी और न ही कोई नेगोशिएशन।"

धमकी, चेतावनी और विरोध के बीच पश्चिम एशिया ही नहीं पूरी दुनिया के लिए 27 मार्च का दिन काफी अहम है। 23 मार्च को ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता का दावा करते हुए कहा था कि बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक है, इसलिए वो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले के फैसले को "5 दिन के लिए टाल रहे हैं।" इसकी मियाद शुक्रवार को समाप्त हो रही है।

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नाटो पर ट्रंप क्यों भड़के और क्या आरोप लगाए?
ट्रंप ने नाटो देशों पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि उन्होंने इस संकट के समय अमेरिका का साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि नाटो देश ईरान के खिलाफ कार्रवाई में शामिल नहीं हुए और केवल तेल की कीमतों को लेकर शिकायत करते रहे। ट्रंप ने यहां तक कहा कि अमेरिका को नाटो की जरूरत नहीं है और सहयोगी देशों को इस समय को कभी नहीं भूलना चाहिए।
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होर्मुज और तेल संकट को लेकर क्या है विवाद?
ट्रंप ने कहा कि नाटो देश होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद नहीं कर रहे हैं, जिससे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। उन्होंने इसे एक आसान सैन्य कार्य बताया, लेकिन कहा कि सहयोगी देश जिम्मेदारी नहीं ले रहे हैं। उनके अनुसार यही कारण है कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। ट्रंप के बयान से साफ है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं। वहीं ईरान के साथ टकराव भी कम होने के बजाय और तेज हो रहा है। ऐसे में पश्चिम एशिया में हालात और बिगड़ सकते हैं और इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

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