पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान को जल्द गंभीर होकर फैसला लेना होगा, वरना हालात ऐसे हो जाएंगे जहां से वापसी संभव नहीं होगी। ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा दिया है। इसी के साथ उन्होंने नाटो देशों पर भी निशाना साधा और सहयोग न करने का आरोप लगाया।
ईरान ने बातचीत की संभावना पर मिले-जुले संकेत दिए हैं, जब ऐसी खबरें आईं कि ट्रंप प्रशासन ने इस हफ्ते की शुरुआत में पाकिस्तान के जरिए तेहरान को 15-सूत्रीय संघर्ष विराम योजना पेश की है। सार्वजनिक रूप से, ईरानी सरकारी मीडिया ने बताया कि तेहरान ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।
युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत नहीं-अब्बास अराघची
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी मीडिया को बताया कि उनकी सरकार ने युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत नहीं की है और न ही उनकी किसी बातचीत की योजना है। हालांकि उन्होंने माना कि यूएस ने दूसरे देशों के जरिए ईरान को संदेश भेजने की कोशिश की थी, उन्होंने कहा कि यह "न तो बातचीत थी और न ही कोई नेगोशिएशन।"
धमकी, चेतावनी और विरोध के बीच पश्चिम एशिया ही नहीं पूरी दुनिया के लिए 27 मार्च का दिन काफी अहम है। 23 मार्च को ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता का दावा करते हुए कहा था कि बातचीत सकारात्मक और रचनात्मक है, इसलिए वो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले के फैसले को "5 दिन के लिए टाल रहे हैं।" इसकी मियाद शुक्रवार को समाप्त हो रही है।