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रूस से डीजल खरीद पर घिरे ट्रंप: बोले- दुनिया में जाएगा तेल; यूक्रेन युद्ध खत्म कराने को लेकर क्या कहा?

Wed, 14 Oct 2026 07:37 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल खरीदने के फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि ईंधन अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के बाजार में सप्लाई बढ़ाने और कीमतें स्थिर करने के लिए है। इस सौदे के तहत रूस से लाखों टन डीजल आने की योजना है और अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 7 अप्रैल 2027 तक प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दी है।

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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस से डीजल खरीदने के फैसले पर अपने ही देश में घिर गए हैं। इस सौदे को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों पार्टियों के नेताओं ने सवाल उठाए हैं। हालांकि, ट्रंप का कहना है कि रूस से आने वाला डीजल अमेरिका के इस्तेमाल के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के बाजार में सप्लाई बढ़ाने और आसमान छूती कीमतों को काबू में रखने के लिए है। दूसरी ओर, यूक्रेन युद्ध को लेकर ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका ने यूक्रेन के साथ खुफिया जानकारी साझा करना बंद नहीं किया है। अमेरिका यूक्रेन और रूस, दोनों के साथ मिलकर युद्ध खत्म कराने की कोशिश कर रहा है।

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'रूस का डीजल अमेरिका नहीं, दुनिया के बाजार के लिए'
रूस के साथ डीजल सौदे पर उठ रहे सवालों के बीच ट्रंप ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि इस समझौते के तहत आने वाला ईंधन अमेरिकी बाजार में नहीं भेजा जाएगा। इसका मकसद दुनिया भर में डीजल की सप्लाई बढ़ाना है, ताकि बढ़ती कीमतों से राहत मिल सके। ट्रंप ने कहा, “यह डीजल का सौदा है, लेकिन अमेरिका के लिए नहीं। इसे दुनिया के बाजार में भेजा जा रहा है, हमारे लिए नहीं।” उन्होंने आगे कहा कि दुनिया के बाजार में ईंधन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। ऐसे में डीजल रिफाइनरियों का बंद होना हालात को और खराब कर सकता है। इसलिए रूस से मिलने वाला डीजल पूरी दुनिया के बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा।

रूस से कितने डीजल की सप्लाई होगी?
ट्रंप ने 9 अक्तूबर को रूस से डीजल मंगाने की घोषणा की थी। इसके तहत रूस पहले 3 लाख टन से ज्यादा डीजल की सप्लाई करेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर उसके तुरंत बाद 10 लाख टन डीजल भेजने की योजना है। इस सप्लाई को आसान बनाने के लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया है। इसके तहत रूस से आने वाले डीजल की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सप्लाई पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी गई है। यह छूट 7 अप्रैल 2027 तक लागू रहेगी।
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अमेरिका ने क्यों लिया यह फैसला?
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब ईरान युद्ध के कारण ईंधन की सप्लाई प्रभावित हुई है और डीजल की कीमतों में तेजी आई है। अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतें भी ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

ट्रंप-पुतिन की बातचीत के बाद हुआ सौदा 
रूस से डीजल खरीदने का ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत के बाद हुआ। इस फैसले पर अमेरिका में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों के नेताओं ने इस समझौते पर आपत्ति जताई है। विवाद इसलिए भी बढ़ा है, क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस ने रूस पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाने और उसके सहयोगी देशों पर दबाव बढ़ाने के लिए ट्रंप को अधिकार दिए थे। चीन और भारत जैसे रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर भी अमेरिकी टैरिफ लगाए गए हैं। ऐसे में रूस से डीजल की सप्लाई को मंजूरी देने के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।

12 अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप को लिखी चिट्ठी
अमेरिकी सीनेट के 12 सांसदों ने मंगलवार को ट्रंप को चिट्ठी लिखकर इस समझौते को रद्द करने की मांग की। इनमें छह डेमोक्रेट और छह रिपब्लिकन सांसद शामिल हैं। सांसदों ने सौदे को अमेरिका के विरोधी रूस के लिए तोहफा और उसके सहयोगियों के साथ विश्वासघात बताया। चिट्ठी पर डेमोक्रेटिक पार्टी के रिचर्ड ब्लूमेंथल, क्रिस कून्स, डिक डर्बिन, जैक रीड, जीन शाहीन और शेल्डन व्हाइटहाउस ने हस्ताक्षर किए। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी की ओर से एलन आर्मस्ट्रॉन्ग, सुसान कॉलिन्स, जॉन कॉर्निन, मिच मैककोनेल, लिसा मुर्कोव्स्की और थॉम टिलिस ने इस पर हस्ताक्षर किए।

सांसदों ने चिट्ठी में क्या लिखा?
सांसदों ने लिखा कि 9 अक्तूबर को पुतिन के साथ हुआ यह समझौता न तो सही नतीजे देगा और न ही इससे अमेरिकी नागरिकों को कोई खास फायदा होगा। उन्होंने ट्रंप से इसे वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि रूस से डीजल की सप्लाई बढ़ाने से अमेरिका में ईंधन की कीमतों पर बहुत मामूली असर पड़ेगा, जबकि रूस को इससे कमाई का मौका मिलेगा।

सांसदों ने क्या लगाया आरोप?
अमेरिकी सांसदों का कहना है कि रूस को डीजल बेचने से मिलने वाला पैसा उसकी युद्ध मशीनरी को मजबूत करेगा। इससे रूस को यूक्रेन के आम नागरिकों पर हमले जारी रखने और लंबे समय तक युद्ध लड़ने में मदद मिल सकती है। सांसदों ने यह भी कहा कि इस समझौते से रूस को होने वाली कमाई का इस्तेमाल चीन, ईरान और उत्तर कोरिया के साथ अपने सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने में किया जा सकता है। उनके मुताबिक, इस सौदे से अमेरिकी नागरिकों को ईंधन की कीमतों में खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है, लेकिन रूस को आर्थिक फायदा जरूर हो सकता है। सांसदों ने माना कि अमेरिका में ऊर्जा की लागत कम करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए रूस को अतिरिक्त कमाई का मौका देना सही रास्ता नहीं है। उनका कहना है कि रूस पर आर्थिक दबाव बनाए रखना ही उसे युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत की मेज पर लाने का प्रभावी तरीका हो सकता है।

रूस पर सख्त कार्रवाई के लिए कानून भी बना चुका है अमेरिका
अमेरिकी कांग्रेस ने पिछले महीने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पारित किया था। ट्रंप ने भी इस कानून पर जल्द हस्ताक्षर कर दिए थे। सांसदों के मुताबिक, इस कानून को दोनों सदनों में व्यापक समर्थन मिला था। उन्होंने अपनी चिट्ठी में कहा कि इस कानून के जरिए राष्ट्रपति को रूस और उसके युद्ध में मदद करने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के अधिकार दिए गए हैं। खास तौर पर चीन जैसे देशों पर दबाव डालकर रूस की युद्ध लड़ने की क्षमता को कमजोर करना इस रणनीति का हिस्सा है। सांसदों का मानना है कि इन अधिकारों का इस्तेमाल रूस को युद्ध खत्म करने के लिए मजबूर करने और एक न्यायपूर्ण समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, रूस से डीजल का सौदा इसी रणनीति के उलट जाता है और अमेरिका की बातचीत करने की स्थिति कमजोर कर सकता है।

'यूक्रेन को खुफिया जानकारी देना बंद नहीं किया' रूस से डीजल सौदे पर विवाद के बीच ट्रंप ने यूक्रेन को अमेरिकी खुफिया जानकारी दिए जाने के मुद्दे पर भी अपना रुख साफ किया। उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका ने यूक्रेन के साथ खुफिया जानकारी साझा करना बंद कर दिया है। इस पर ट्रंप ने कहा, 'नहीं, हमने ऐसा नहीं किया है। हमने उनकी मदद की है।' ट्रंप ने कहा कि अमेरिका यूक्रेन की मदद कर रहा है, लेकिन उसका मुख्य मकसद युद्ध को किसी अंतिम नतीजे तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा, 'हम खुफिया जानकारी साझा कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि युद्ध खत्म हो। इसलिए हम यूक्रेन और रूस, दोनों के साथ मिलकर युद्ध समाप्त कराने की दिशा में काम कर रहे हैं।' उनके इस बयान से साफ है कि ट्रंप प्रशासन रूस के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहता है, जबकि यूक्रेन के साथ सहयोग भी जारी रखने की बात कर रहा है।

'दोनों देश युद्ध खत्म करना चाहते हैं, लेकिन रास्ता नहीं मिल रहा'
यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध पर ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि दोनों देश अब लड़ाई खत्म करना चाहते हैं, लेकिन वे इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि वहां तक पहुंचा कैसे जाए। ट्रंप ने कहा, 'मुझे लगता है कि वे दोनों इसे खत्म करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उस मुकाम तक कैसे पहुंचा जाए। दोनों के बीच बहुत नफरत है। हम उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाकर रहेंगे।' ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका दोनों पक्षों के साथ बातचीत करके युद्ध समाप्त कराने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, रूस से डीजल खरीदने के फैसले पर अमेरिकी सांसदों की नाराजगी बताती है कि इस दिशा में ट्रंप को अपने ही देश में राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

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एक तरफ युद्ध खत्म कराने की कोशिश, दूसरी तरफ रूस को आर्थिक फायदा देने के आरोप
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि रूस से डीजल की सप्लाई दुनिया के बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को स्थिर करने के लिए की जा रही है। लेकिन अमेरिकी सांसदों को आशंका है कि इस सौदे से रूस को मिलने वाला पैसा यूक्रेन के खिलाफ उसकी सैन्य कार्रवाई को जारी रखने में मदद कर सकता है। ऐसे में ट्रंप के सामने दोहरी चुनौती है। एक ओर उन्हें रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म कराने के लिए बातचीत आगे बढ़ानी है, तो दूसरी ओर अपने ही देश में यह भरोसा भी कायम रखना है कि रूस के प्रति उनकी नीति अमेरिकी हितों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के खिलाफ नहीं जा रही।

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