पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को कैंप डेविड में एक अहम बैठक बुलाने जा रहे हैं। इस बैठक में ईरान के साथ जारी वार्ता को लेकर ट्रंप प्रशासन के अगले कदमों पर चर्चा की जाएगी। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
बैठक अहम क्यों है?
रिपोर्ट के मुताबिक, इस उच्च स्तरीय बैठक में कैबिनेट के सभी सदस्य शामिल होंगे। इसमें राष्ट्रीय खुफिया निदेशक पद से इस्तीफा दे चुकीं तुलसी गबार्ड भी हिस्सा लेंगी। ईरान के साथ जटिल कूटनीतिक स्थिति के बीच यह बैठक अहम मानी जा रही है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अस्थायी युद्ध विराम कमजोर पड़ता दिख रहा है और अमेरिकी प्रशासन आगे की रणनीति पर विचार कर रहा है। कैंप डेविड को आमतौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा और बड़े कूटनीतिक फैसलों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
वाशिंगटन डीसी से कभी बातचीत की उम्मीद तो कभी सख्त रुख अपनाने के संकेत मिले हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान के साथ समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है और कोई बड़ी सफलता मिल सकती है। हालांकि, ईरान के नेताओं ने इस दावे को खारिज किया। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच अब भी कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। किसी अंतिम समझौते की स्थिति अभी नहीं है।
ट्रंप प्रशासन सार्वजनिक रूप से बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद जता रहा है, लेकिन साथ ही सैन्य तैयारी भी है। ट्रंप कई बार चेतावनी दे चुके हैं कि अगर बातचीत विफल हुई तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला है।
ईरानी मिसाइल लॉन्च साइट्स और नौकाओं पर हमले
इस बीच, सीएनएन की रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के साथ जारी युद्ध विराम के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी मिसाइल लॉन्च साइट्स और नौकाओं पर 'आत्मरक्षा में हमले' किए। अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने इसकी पुष्टि की है।
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सेंटकॉम ने क्या कहा?
सेंटकॉम के प्रवक्ता टिमोथी हॉकिंस ने सीएनएन से कहा, अमेरिकी बलों ने दक्षिणी ईरान में अपनी सेना को खतरे से बचाने के लिए आत्मरक्षा में कार्रवाई की। उन्होंने बताया कि निशाने पर मिसाइल लॉन्च साइट्स और वे ईरानी नौकाएं थीं जो समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि सेंटकॉम युद्ध विराम के दौरान संयम बरतते हुए अपनी सेना की सुरक्षा जारी रखे हुए है। यह ताजा घटनाक्रम दिखाता है कि बातचीत जारी रहने के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव और अस्थिरता बनी हुई है। युद्ध विराम के दौरान पहले भी अमेरिकी और ईरानी बलों के बीच गोलीबारी हो चुकी है।