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WHO: ट्रंप के फैसले ने बढ़ाई डब्ल्यूएचओ की चिंता, महानिदेशक बोले- सदस्य देश अमेरिकी राष्ट्रपति पर डालें दबाव

Mon, 03 Feb 2025 03:24 PM IST
बशु जैन वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जेनेवा

सार

डब्ल्यूएचओ के प्रमुख ने सदस्य देशों से कहा है कि वे संयुक्त राष्ट्र की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी से हटने के अमेरिका के फैसले को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करें। वे फैसले को पलटने के लिए राष्ट्रपति पर दबाव डालें। राजनयिकों के साथ हुई बैठक में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने इस पर जोर दिया। 
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डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनते ही अमेरिका को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ ) से अलग कर लिया था। ट्रंप के इस फैसले ने डब्ल्यूएचओ की चिंता बढ़ा दी है। अब डब्ल्यूएचओ के प्रमुख ने सदस्य देशों से कहा है कि वे संयुक्त राष्ट्र की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी से हटने के अमेरिका के फैसले को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करें। वे फैसले को पलटने के लिए राष्ट्रपति पर दबाव डालें। राजनयिकों के साथ हुई बैठक में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने इस पर जोर दिया कि संगठन से हटने के बाद अमेरिका वैश्विक बीमारी के प्रकोप के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी से वंचित रह जाएगा। 

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने कहा कि अमेरिकी रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र के अधिकारियों को डब्ल्यूएचओ के साथ काम करना बंद करने के लिए कहा गया है। लेकिन संगठन अभी भी कुछ अमेरिकी वैज्ञानिकों को डाटा उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने संगठन के सदस्य देशों से कहा कि हम अमेरिका को जानकारी इसलिए दे रहे हैं, क्योंकि उनको इसकी जरूरत है। अगर सदस्य देश अमेरिका पर अपने फैसले को लेकर दबाव डालते हैं या फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए ट्रंप से बात करते हैं तो हमें बहुत खुशी होगी। 

ट्रेडोस ने ट्रंप की ओर से विश्व स्वास्थ्य  संगठन छोड़ने के बताए गए कारणों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप कहते हैं कि डब्ल्यूएचओ ने कोरोना को ठीक से संभाला नहीं। जबकि हमने जनवरी 2020 में ही दुनिया भर को कोरोना के संभावित खतरों के बारे में सचेत किया था। इसके बाद हमने कई सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप मानते हैं कि अमेरिका बजट को लेकर नहीं बल्कि बीमारियों के प्रकोप विवरण और स्वास्थ्य सूचनाओं में शून्यता को लेकर संगठन से बाहर हुआ है। मगर इसका सामना अमेरिका को भविष्य में करना पड़ेगा। ट्रेडोस ने कहा कि अमेरिका को विश्व स्वास्थ्य संगठन में वापस लाना जरूरी है। इसमें सदस्य देश बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। 
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डब्ल्यूएचओ को बड़ा फंड देता है अमेरिका
अमेरिका के बाहर निकलने पर डब्ल्यूएचओ की चिंता बढ़ी हुई है। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिका डब्ल्यूएचओ को बड़ा फंड देता है। 2024-25 में अमेरिका ने डब्ल्यूएचओ को 988 मिलियन डॉलर का फंड दिया था, जो एजेंसी के कुल बजट 6.9 बिलियन डॉलर का 14 फीसदी है। वहीं आपातकालीन स्वास्थ्य कार्यक्रम में अमेरिका का बड़ा योगदान रहा है। एक दस्तावेज के मुताबिक डब्ल्यूएचओ के आपातकालीन अभियानों में अमेरिकी फंडिंग रीढ़ की हड्डी की भूमिका निभाती है। यूक्रेन, सूडान, पश्चिम एशिया में चल रहे संकट, पोलियो उन्मूलन, एचआईवी कार्यक्रम हों या टीबी को लेकर हो रहे प्रयास हों सभी अमेरिका के बजट बड़ा योगदान रहा है। 

डब्ल्यूएचओ के वित्त निदेशक जॉर्ज काइरियाकौ का कहना है कि  अमेरिका ने अभी तक 2024 के लिए डब्ल्यूएचओ को दिए जाने वाले योगदान का भुगतान नहीं किया है। अगर अमेरिका ने भुगतान नहीं किया तो एजेंसी घाटे में चली जाएगी। ऐसे में संगठन को अपने खर्च में कटौती करनी होगी। अगर एजेंसी अपनी वर्तमान दर पर खर्च करती रही तो 2026 की पहली छमाही में हमारा नकदी प्रवाह बहुत मुश्किल स्थिति में होगा।

सदस्य देशों ने पूछे सवाल
बजट को लेकर हुई बैठक में डब्ल्यूएचओ के सदस्य देशों ने महानिदेशक से अमेरिका के संकट से निपटने को लेकर सवाल पूछे। जर्मनी के स्वास्थ्य मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार कुम्मेल ने अमेरिका के बाहर निकलने को डब्ल्यूएचओ के लिए बड़ा संकट बताया। उन्होंने पूछा कि अगर अमेरिका की फंडिंग समाप्त हो जाएगी तो डब्ल्यूएचओ के कौन से कार्य रुक जाएंगे? बांग्लादेश और फ्रांस के अधिकारियों ने पूछा कि अमेरिकी फंडिंग की कमी से निपटने के लिए डब्ल्यूएचओ के पास क्या योजना है? इसके चलते किन स्वास्थ्य कार्यक्रमों में कटौती की जाएगी? 

अमेरिका को भी मिलता है लाभ
डब्ल्यूएचओ से बाहर निकलने के ट्रंप के फैसले को लेकर विशेषज्ञों ने अपनी राय साझा की है। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ पॉलिसी एंड पॉलिटिक्स के निदेशक मैथ्यू कवानाघ का कहना है कि अमेरिकी स्वास्थ्य बजट का एक फीसदी से भी कम हिस्सा डब्ल्यूएचओ को जाता है। इसके बदले में अमेरिका को कई तरह के लाभ मिलते हैं जो काफी मायने रखते हैं। इसमें वैश्विक स्तर पर बीमारी और महामारी के बारे में खुफिया जानकारी और टीकों के लिए वायरस के नमूने शामिल हैं। एजेंसी से बाहर निकलना अमेरिकियों के लिए बदतर स्वास्थ्य परिणामों को जन्म देगा।

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