रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिशों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। रूस को प्रतिबंधों में राहत देने के अमेरिकी फैसलों, रूसी तेल ठिकानों पर यूक्रेन के हमलों और यूक्रेनी सेना को मिलने वाली अमेरिकी खुफिया जानकारी को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद गहरा गए हैं।
इसी बीच ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ संभावित त्रिपक्षीय बैठक में शामिल होने की इच्छा जताई है। इस पहल ने सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यूक्रेन युद्ध पर होने वाली किसी बड़ी कूटनीतिक बातचीत में यूक्रेन को ही बाहर रखा जा सकता है।
जेलेंस्की को लेकर क्या बोले ट्रंप?
सीएनबीसी के अनुसार सोमवार को व्हाइट हाउस से रवाना होते समय ट्रंप ने कहा कि युद्ध समाप्त कराने के लिए वह ऐसी किसी भी कोशिश के लिए तैयार हैं, चाहे संबंधित बैठक में जेलेंस्की मौजूद हों या नहीं। उन्होंने कहा कि अगर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस तरह की बैठक चाहते हैं तो वह इसमें शामिल होने को तैयार हैं। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि बातचीत में व्यापार जैसे दूसरे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। हालांकि, बैठक की तारीख, एजेंडे और प्रारूप पर कोई अंतिम सहमति सामने नहीं आई है।
ट्रंप ने जेलेंस्की पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यूक्रेनी राष्ट्रपति को मौजूदा परिस्थितियों की सही समझ है। उन्होंने दावा किया कि जेलेंस्की को युद्ध का समाधान काफी पहले निकाल लेना चाहिए था और अब यूक्रेन की ओर से बातचीत के लिए किसी दूसरे व्यक्ति को आगे आना चाहिए। यह टिप्पणी उनके उस पुराने रुख के अनुरूप है, जिसमें वह यूक्रेन के नेतृत्व पर युद्ध समाप्त करने के लिए अधिक लचीला रुख अपनाने का दबाव डालते रहे हैं।
पुतिन-शी के साथ बैठक की चर्चा, यूक्रेन की चिंता बढ़ी
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक पुतिन ने नौ अक्टूबर को ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत के दौरान अगले महीने शी जिनपिंग के साथ त्रिपक्षीय बैठक का विचार रखा था। यह बैठक चीन के शेनझेन शहर में 18 और 19 नवंबर को प्रस्तावित एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है। हालांकि, क्रेमलिन ने सोमवार को स्पष्ट किया कि बैठक या उसके संभावित एजेंडे और स्वरूप को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव अथवा समझौता नहीं हुआ है।
ट्रंप ने पहले पुतिन और शी के साथ परमाणु निरस्त्रीकरण पर बातचीत करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि रूस और चीन ने ईरान को लेकर जारी अमेरिकी सैन्य प्रयासों के संदर्भ में बहुत कम मदद की है। ऐसे में प्रस्तावित बैठक का वास्तविक उद्देश्य और उसमें यूक्रेन युद्ध को कितनी प्राथमिकता मिलेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।यूक्रेन ने इस संभावित बैठक को लेकर आपत्ति जताई है।
यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने कहा कि पुतिन को ऐसी बैठक में आमंत्रित करने से उन्हें अनावश्यक प्रतिष्ठा मिलेगी और वह इसे अपनी राजनीतिक छवि मजबूत करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। उनके अनुसार, यूक्रेन को शामिल किए बिना युद्ध पर चर्चा करने से शांति की संभावना बढ़ने के बजाय पुतिन का हौसला बढ़ सकता है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान कहा कि उन्हें बैठक के बारे में चर्चा की जानकारी है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि कोई अंतिम निर्णय लिया गया है या नहीं।
प्रतिबंधों में राहत पर जेलेंस्की का विरोध
अमेरिका और यूक्रेन के बीच तनाव का एक बड़ा कारण रूस को आर्थिक राहत देने के ट्रंप प्रशासन के फैसले हैं। ट्रंप ने हाल में रूसी डीजल के वैश्विक बाजार में आपूर्ति की अनुमति देने वाले समझौते का बचाव किया है। इसके अलावा, उन्होंने रूस पर कुछ नए प्रतिबंधों के प्रावधानों में छूट दी है। संबंधित प्रतिबंध विधेयक पिछले महीने अमेरिकी कांग्रेस में व्यापक द्विदलीय समर्थन के साथ पारित हुआ था।
ट्रंप का तर्क है कि रूस को पूरी तरह अलग-थलग करने से शांति वार्ता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि वह रूस और यूक्रेन के बीच शांति स्थापित करने के लिए बातचीत कर रहे हैं और ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहते, जिससे रूस बातचीत की मेज से दूर चला जाए। उनके मुताबिक, यूक्रेन, ईरान, डीजल आपूर्ति और बंधकों की रिहाई जैसे मुद्दों पर बातचीत जारी रखना जरूरी है।
जेलेंस्की ने इसके उलट कहा है कि प्रतिबंधों में छूट से रूस की युद्ध लड़ने की क्षमता मजबूत होगी। सीएनएन के मुताबिक ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकताओं में ऊर्जा की कीमतों पर दबाव कम करना भी शामिल है। अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच प्रशासन को आगामी मध्यावधि चुनावों से पहले घरेलू आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
जेलेंस्की ने अमेरिकी टेलीविजन कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में कहा था कि यदि अमेरिका रूस का पक्ष लेने लगता है तो यह ऐतिहासिक भूल होगी। हालांकि, उन्होंने ट्रंप पर भरोसा बनाए रखने की इच्छा भी जताई और उम्मीद व्यक्त की कि अमेरिकी राष्ट्रपति पुतिन के प्रति अपना रुख बदलेंगे।
रूसी तेल ठिकानों पर यूक्रेन के हमले से बढ़ा विवाद
रूस को आर्थिक राहत देने की अमेरिकी कोशिशों के बीच यूक्रेन ने रूसी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर लंबी दूरी के ड्रोन हमले जारी रखे हैं। 18 अक्टूबर को यूक्रेन ने सेंट पीटर्सबर्ग स्थित तेल टर्मिनल को निशाना बनाया। यूक्रेनी ड्रोन निर्माता कंपनी फायर प्वाइंट ने हमले के बाद टर्मिनल परिसर में आग लगने की जानकारी दी। इस टर्मिनल की सालाना क्षमता 1.25 करोड़ टन तक बताई गई है।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार हमलों में एक व्यक्ति की मौत हुई और पांच लोग घायल हुए। कुछ आवासीय इमारतों को भी नुकसान पहुंचा। रूसी वितरण कंपनी ओजोन के एक लॉजिस्टिक्स केंद्र और सोशल मीडिया मंच वीके के डेटा सेंटर पर भी हमले की खबरें सामने आईं।ट्रंप ने पहले यूक्रेन से रूसी तेल शोधन संयंत्रों पर हमले रोकने की मांग की थी। पिछले सप्ताह उन्होंने यूक्रेनी हमलों को शर्मनाक बताते हुए कहा था कि जेलेंस्की के साथ बातचीत करना पुतिन की तुलना में अधिक कठिन है। इसके बावजूद कीव ने रूसी ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना जारी रखा है।
दोनों देशों के बीच ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने को लेकर भी विवाद है। ट्रंप ने करीब एक सप्ताह पहले दावा किया था कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। हालांकि, न तो कीव और न ही मॉस्को ने ऐसे किसी औपचारिक समझौते की पुष्टि की। जेलेंस्की ने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति की घोषणा के बाद रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा, तेल और गैस क्षेत्र पर 76 बार हमले किए। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है।
ट्रंप प्रशासन की चिंता यह है कि रूसी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर यूक्रेन के हमले जारी रहने से तेल और डीजल की वैश्विक आपूर्ति तथा कीमतों पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, यूक्रेन का कहना है कि रूसी ऊर्जा और सैन्य ढांचे को निशाना बनाना मॉस्को की युद्ध क्षमता कमजोर करने के लिए जरूरी है।
स्टारलिंक और खुफिया सहयोग पर भी आमने-सामने
अमेरिका-यूक्रेन संबंधों में बढ़ती खाई का दूसरा बड़ा कारण सैन्य संचार और खुफिया जानकारी साझा करने से जुड़ा विवाद है। जेलेंस्की ने आरोप लगाया है कि एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की स्टारलिंक और स्टारशील्ड सेवाओं में हाल में आई बाधाओं से यूक्रेनी सेना की परिचालन क्षमता प्रभावित हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस की ओर से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के हमलों की अग्रिम चेतावनी देने वाली अमेरिकी खुफिया जानकारी समय पर नहीं मिल रही है।
यूक्रेन के लिए उपग्रह संचार और खुफिया जानकारी बेहद महत्वपूर्ण हैं। इनके माध्यम से उसकी सेना युद्धक्षेत्र में संचार बनाए रखने, ड्रोन संचालन करने और रूसी मिसाइल हमलों के प्रति सतर्क रहने में सक्षम होती है। इन सेवाओं में किसी भी तरह की बाधा से सैनिकों और नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
जेलेंस्की ने सोमवार को अमेरिकी कांग्रेस के दोनों दलों के सांसदों के साथ ऑनलाइन बातचीत के बाद कहा कि इन समस्याओं के बारे में अमेरिका की ओर से यूक्रेन को कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। उन्होंने मौजूदा स्थिति को युद्ध शुरू होने के बाद से सबसे कठिन दौर बताया और आशंका जताई कि यूक्रेन के लिए अमेरिकी समर्थन धीमा करने का कोई राजनीतिक फैसला लिया गया है।
हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने आरोपों को खारिज किया है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका ने यूक्रेन के साथ खुफिया जानकारी साझा करना बंद नहीं किया है। ट्रंप ने भी कहा कि उन्हें जानकारी नहीं है कि स्टारलिंक सेवा पर प्रतिबंध किसने लगाया, लेकिन वह इसका पता लगाना चाहेंगे।
एलन मस्क ने पिछले सप्ताह कहा था कि इन प्रणालियों पर अंतिम नियंत्रण अमेरिकी सरकार का है और सेवा की गति या उपयोग को सीमित करने का फैसला सरकार ही कर सकती है। दूसरी ओर, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने जेलेंस्की को ऐसे बयान देने में सावधानी बरतने की सलाह दी, जिन्हें उन्होंने गलत बताया। इस तरह, सेवा में कथित बाधा को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन उसके कारणों पर कोई साझा स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
अमेरिकी सांसदों और यूरोप की बढ़ती चिंता
अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने रूस को आर्थिक राहत देने और यूक्रेन के सैन्य सहयोग पर उठे सवालों को लेकर चिंता जताई है। अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और थॉम टिलिस ने एक संयुक्त बयान में कहा कि रूस की युद्ध क्षमता को आर्थिक मदद देना, यूक्रेन के उपग्रह संचार को बाधित करना और उसकी वायु रक्षा को कमजोर करना शांति की राह में बाधाएं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि रूसी राष्ट्रपति को खुश करने की कोशिश युद्ध को लंबा खींच सकती है और जनहानि बढ़ा सकती है।
जेलेंस्की ने अमेरिकी सांसदों को रूस के खार्किव क्षेत्र में हुए हमले की तस्वीरें भी दिखाईं। उनके अनुसार इस हमले में छह लोगों की मौत हुई, जिनमें तीन बच्चे शामिल थे। उन्होंने कहा कि रूस को प्रतिबंधों में राहत देने के बीच ऐसे हमले जारी रहना इस बात का संकेत है कि मॉस्को पर दबाव कम करना उचित नहीं है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर से भी बातचीत की है।
जेलेंस्की ने संकेत दिया कि दोनों के साथ संभावित बैठक नॉर्वे में हो सकती है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन शांति की दिशा में प्रयास कर रहा है, लेकिन किसी भी समझौते में देश की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।यूरोप और कीव में इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि ट्रंप प्रशासन पुतिन को समझौते के लिए तैयार करने के उद्देश्य से मॉस्को को और रियायतें दे सकता है। जेलेंस्की का कहना है कि यूक्रेन ने युद्ध नहीं चाहा और वह सम्मानजनक शांति के हर प्रयास का स्वागत करता है। हालांकि, वह यह भी स्पष्ट कर चुके हैं कि केवल युद्धविराम पर्याप्त नहीं होगा, यदि उसके बाद रूस के दोबारा हमला करने की आशंका बनी रहती है।
शांति की कोशिशों के सामने कठिन चुनौती
अमेरिका और यूक्रेन के बीच मौजूदा तनाव ऐसे समय बढ़ रहा है, जब रूस के हमले जारी हैं और युद्ध समाप्त कराने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी चल रहे हैं। जेलेंस्की ने पोप लियो चौदहवें से भी बातचीत की है। वेटिकन के अनुसार पोप ने इससे पहले पुतिन के साथ बातचीत में रूसी कब्जे वाले यूक्रेनी शहर ओलेश्की की गंभीर मानवीय स्थिति पर चिंता जताई थी।
फिलहाल, ट्रंप प्रशासन रूस के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखने पर जोर दे रहा है, जबकि यूक्रेन का मानना है कि मॉस्को पर दबाव कम करने से शांति के बजाय युद्ध लंबा खिंच सकता है। पुतिन और शी जिनपिंग के साथ संभावित बैठक को लेकर भी यही मतभेद सामने आ रहे हैं। यदि ऐसी बातचीत होती है, तो उसका महत्व केवल इस बात से तय नहीं होगा कि कौन-कौन नेता उसमें शामिल होते हैं, बल्कि इससे भी तय होगा कि यूक्रेन की सुरक्षा, रूस की जवाबदेही और किसी संभावित समझौते को लागू कराने के उपायों पर क्या सहमति बनती है।
युद्ध समाप्त कराने के लिए कूटनीतिक पहल जरूरी है, लेकिन अमेरिका और यूक्रेन के बीच भरोसे की कमी, रूसी हमलों का जारी रहना और प्रतिबंधों को लेकर मतभेद इस प्रक्रिया को कठिन बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होना बाकी है कि ट्रंप की बातचीत की रणनीति दोनों पक्षों को समझौते के करीब लाएगी या वाशिंगटन और कीव के बीच बढ़ती दूरी शांति प्रयासों को और जटिल बना देगी।