अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि अगर उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार बनाने से नहीं रोका होता, तो आज इस्राइल और पूरा पश्चिम एशिया तबाह हो चुका होता। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि इस पूरे क्षेत्र को बचाने के लिए उनका दखल देना बेहद जरूरी था। उन्होंने कहा कि भले ही कोई इस बात को खुलकर न कहे, लेकिन सभी जानते हैं कि यह सच है।
ईरान पर हमले फिर शुरू करने की तैयारी?
ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू होने की आशंका बढ़ गई है। फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने गुरुवार को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ बैठक की। इस दौरान ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान फिर से शुरू करने पर चर्चा हुई। रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि बुधवार और गुरुवार को व्हाइट हाउस में भी कई अहम बैठकें हुई थीं।
9 नवंबर की अमावस्या पर टिकी नजरें
फॉक्स न्यूज के मुताबिक, 9 नवंबर को पश्चिम एशिया में अमावस्या होगी। इस दौरान आसमान में चांद की रोशनी बेहद कम रहेगी। सैन्य रणनीति के लिहाज से रात का अंधेरा हमले करने के लिए अनुकूल माना जाता है। ऐसे में इस तारीख को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ट्रंप बोले- जल्द लेंगे बड़ा फैसला
गुरुवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध फिर शुरू करना है या नहीं, इस पर जल्द फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या अमेरिका को और हमले करने चाहिए, ताकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म किया जा सके और भविष्य में वह दोबारा ऐसा करने की स्थिति में न रहे। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के बाकी हिस्सों को तबाह नहीं करना चाहते, लेकिन जरूरत पड़ी तो ऐसा कदम उठाना पड़ सकता है।
अमेरिकी सेना ने तेज की सैन्य तैयारी
इस बीच, एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ईरान में बड़े सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। हालांकि, अभी तक व्हाइट हाउस की ओर से हमले शुरू करने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं दिया गया है।
ये भी पढ़ें:
अमेरिका: भारतवंशी नित्या को यूं ही नहीं मिली सफलता, कभी सरकारी अफसर ने कहा था- जूते और राजनीति बाहर छोड़कर आना
इराक ने ट्रंप के सामने रखा अपना पक्ष
दूसरी ओर, इराक के प्रधानमंत्री अली फलेह अल-ज़ैदी ने गुरुवार को फोन पर ट्रंप से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने साफ कहा कि इराक की जमीन का इस्तेमाल किसी भी सूरत में पड़ोसी देशों पर हमला करने के लिए नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर बयान जारी कर कहा कि इराक सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करता है और अपनी जमीन से किसी पड़ोसी देश के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई की अनुमति नहीं देना चाहता।