ट्रंप प्रशासन नकली शरणार्थियों पर नकेल कसने की तैयारी में है। प्रशासन ने बृहस्पतिवार (स्थानीय समयानुसार) को कई देशों के सामने यह राय रखी कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से चली आ रही वैश्विक शरण प्रणाली का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ है। साथ ही उनसे इस तरह के प्रवासन पर नकेल कसने में अमेरिका का साथ देने की अपील की।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के इतर, अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडो ने कोसोवो, बांग्लादेश, लाइबेरिया और पनामा के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। इस बैठक का मकसद यह जानना था कि अमेरिका के प्रस्ताव को लेकर शुरुआती स्तर पर कितना समर्थन और रुचि मिल सकती है। लैंडो ने शुरुआती संबोधन में कहा, 'अगर आपके पास लाखों नकली शरणार्थी हैं, तो असली शरण प्रणाली का क्या होगा? प्रक्रिया में खामियां बताना न तो विदेशियों से नफरत है और न ही यह किसी के बुरा इंसान होने की निशानी।'
बदलावों में शरण को अस्थायी दर्जा दिया जाना चाहिए
अमेरिका ने कहा कि बदलावों में कम से कम शरण को एक अस्थायी दर्जा दिया जाना चाहिए और यह निर्देश दिया जाना चाहिए कि सुरक्षा चाहने वालों को अंतत: स्वदेश लौटना होगा। ट्रंप प्रशासन ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी व्यक्ति को अपनी पसंद का देश चुनकर शरण लेने का अधिकार नहीं है। इस पर फैसला देशों के पास है, किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन के पास नहीं।
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अमेरिकी प्रस्ताव को लेकर मानवाधिकार संगठन सतर्क
मानवाधिकार संगठन इस प्रस्ताव को लेकर सतर्क हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच के शरणार्थी एवं प्रवासी अधिकारों के निदेशक बिल फ्रेलिक ने कहा कि अमेरिका का यह प्रस्ताव 'वैश्विक शरणार्थी प्रणाली को तोड़ने की दिशा में पहला कदम लगता है।' उन्होंने प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें उस मूल सिद्धांत को नहीं अपनाया गया है, जिसमें कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को ऐसे देश नहीं भेजा जा सकता, जहां उसे उत्पीड़न का खतरा हो।
2017 से शरणार्थियों के लिए शीर्ष गंतव्य रहा है अमेरिका
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के 2024 के आंकड़ों के अनुसार, 2017 से अब तक अमेरिका शरणार्थियों के लिए शीर्ष गंतव्य रहा है, जबकि जर्मनी दूसरे स्थान पर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों का कहना है कि कमजोर मुकदमों वाले लोगों ने अमेरिका में प्रवेश पाने के लिए इस व्यवस्था का दुरुपयोग किया है, वर्क परमिट हासिल कर लिए हैं। जबकि उनके लंबित मामलों को आव्रजन अदालतों में वर्षों लग जाते हैं।
अमेरिका में कोई भी व्यक्ति मांग सकता है शरण
बता दें कि अमेरिका 1951 के शरणार्थी कन्वेंशन के तहत बनी वैश्विक शरण प्रणाली से जुड़ा है और 1980 में इसे अमेरिकी कानून का हिस्सा भी बनाया गया। अमेरिका में कोई भी व्यक्ति शरण मांग सकता है, चाहे वह कानूनी रूप से आया हो या नहीं। शरण पाने के लिए यह साबित करना होता है कि अपने देश में उसे जाति, धर्म, राष्ट्रीयता, किसी खास सामाजिक समूह से जुड़ाव या राजनीतिक राय के कारण उत्पीड़न का डर है। अगर किसी को शरण मिल जाती है तो उसे देश से निकाला नहीं जा सकता, कानूनी तौर पर काम कर सकता है, अपने करीबी परिवार को बुला सकता है और आगे चलकर नागरिकता तक हासिल कर सकता है।
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अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर शरण चाहने वालों की संख्या बढ़ी
हाल के वर्षों में अमेरिका-मैक्सिको सीमा पर शरण चाहने वालों की संख्या बहुत बढ़ गई है, जिससे आप्रवासन अदालतें बोझिल हो गई हैं। आलोचकों का कहना है कि कई लोग नौकरी या दूसरे कारणों से आते हैं, जो शरण के मानदंडों पर खरे नहीं उतरते। सीमा पर बड़ी संख्या में प्रवासियों को लेकर हो रही आलोचना के बीच बाइडन प्रशासन ने भी ऐसे कदम उठाए, जिन्होंने शरण पाने की प्रक्रिया को काफी सीमित कर दिया।
ट्रंप ने पदभार संभालते ही एक आदेश पर किए हस्ताक्षर
पदभार संभालने के पहले ही दिन, ट्रंप ने एक आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें दक्षिणी सीमा पर आक्रमण घोषित कर दिया गया और कहा कि जब तक वह इसे खत्म घोषित नहीं करते, तब तक प्रवासियों का देश में प्रवेश और शरण का अधिकार निलंबित रहेगा। आप्रवासन समर्थकों ने इस आदेश के खिलाफ मुकदमा किया है और मामला अदालत में है।