माली ने फ्रांस के साथ आतंकवाद-रोधी सहयोग खत्म कर दिया है और बामाको स्थित फ्रांसीसी दूतावास के पांच कर्मचारियों को निष्कासित किया है। यह कदम हालिया राजनयिक तनाव के बीच उठाया गया है। पहले फ्रांस ने पेरिस में माली दूतावास के दो अधिकारियों को निकाला था।
माली और फ्रांस के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। माली की सत्तारूढ़ सेना ने फ्रांस के साथ आतंकवाद-रोधी सहयोग समाप्त करने की घोषणा की है और फ्रांसीसी दूतावास के पांच कर्मचारियों को देश से निकाल दिया है। यह जानकारी बृहस्पतिवार (स्थानीय समयानुसार) को एक गोपनीय पत्र से मिली है।
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17 सितंबर को माली के विदेश मंत्रालय की ओर से राजधानी बामाको स्थित फ्रांसीसी दूतावास को भेजे गए नोट में कहा गया कि इन पांच कर्मचारियों को पर्सोना नॉन ग्राटा (अवांछित व्यक्ति) घोषित किया गया है और 'आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को पूरी तरह समाप्त किया जाता है।' हालांकि, मंत्रालय के नोट में दूतावास के कर्मचारियों को निष्कासित करने का कोई विवरण नहीं बताया गया है।
फ्रांस ने माली के दो खुफिया अधिकारियों को किया था निष्कासित
फ्रांस के एक राजनयिक सूत्र ने बताया कि माली का यह कदम, फ्रांस द्वारा पिछले हफ्ते पेरिस स्थित माली दूतावास के दो खुफिया अधिकारियों को निकालने और आतंकवाद-रोधी सहयोग को निलंबित करने के जवाब में उठाया गया है।
फ्रांसीसी दूतावास के अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद बिगड़े हालात
हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच राजनयिक तनाव बढ़ गया है। अगस्त में बामाको स्थित फ्रांसीसी दूतावास के एक खुफिया अधिकारी को गिरफ्तार किए जाने के बाद से हालात और बिगड़ गए। माली अधिकारियों ने उस फ्रांसीसी नागरिक पर आरोप लगाया था कि वह माली की सेना के कुछ अधिकारियों, जिनमें दो जनरल भी शामिल थे, की मदद से तख्तापलट की साजिश रच रहा था।
अल-कायदा और आईएस से जुड़े चरमपंथियों की हिंसा झेल रहे माली, बुर्किना फासो और नाइजर
माली, बुर्किना फासो और नाइजर लंबे समय से अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट समूह (आईएस) से जुड़े चरमपंथियों की हिंसा झेल रहे हैं। दो सैन्य तख्तापलटों के बाद, माली की जुंटा सरकार ने फ्रांसीसी सैनिकों को देश से निकाल दिया और सुरक्षा मदद के लिए रूस का रुख किया। इसके बावजूद सुरक्षा हालात नाजुक बने हुए हैं और हाल के महीनों में अल-कायदा से जुड़े समूहों के हमले और तेज हुए हैं। फ्रांसीसी सैनिकों की वापसी के बावजूद, अब तक माली और फ्रांस की खुफिया एजेंसियां आतंकवाद-रोधी सहयोग जारी रखे हुए थीं।