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West Asia Crisis: 'कायरों हम इसे याद रखेंगे', ईरान युद्ध में शामिल न होने पर NATO देशों पर फिर भड़के ट्रंप

Fri, 20 Mar 2026 07:47 PM IST
Rahul Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन।

सार

पश्चिम एशिया में जंग छेड़ने के बाद ट्रंप ने साथी देशों से अपील की थी कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजें। ट्रंप ने यह अपील ईरान की तरफ से होर्मुज बंद करने के प्रयासों के बाद की थी। ट्रंप की इस अपील को असर किसी भी देश पर नहीं हुआ, अब इसे लेकर उन्होंने सभी पर निशाना साधा है। पढ़ें उन्होंने क्या कहा है...
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डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार नाटो देशों पर निशाना साधा है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर नाटो देशों को निशाने पर लेते हुए कहा, वे कायर हैं, क्योंकि वे ईरान युद्ध में शामिल नहीं हुए और न ही होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद के लिए अपनी सेनाएं भेजीं।

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यूरोप और नाटो देशों पर फूटा ट्रंप का गुस्सा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका के बिना नाटो एक कागजी शेर है! वे परमाणु शक्ति संपन्न ईरान को रोकने की लड़ाई में शामिल नहीं होना चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा, अब जब वह लड़ाई सैन्य रूप से जीत ली गई है और उनके लिए खतरा भी बहुत कम है, तो वे तेल की उन ऊंची कीमतों की शिकायत कर रहे हैं जो उन्हें चुकानी पड़ रही हैं। ट्रंप ने आगे कहा कि वे होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में मदद नहीं करना चाहते, जो कि एक साधारण सैन्य कदम है जिसकी वजह से तेल की कीमतें बढ़ी हैं। उनके लिए ऐसा करना कितना आसान है और इसमें जोखिम भी बहुत कम है। कायरों हम यह बात याद रखेंगे!
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ट्रंप ने क्या की थी अपील, साथी देशों पर क्यों नहीं पड़ा असर?
अमेरिका-इस्राइल की तरफ से ईरान पर हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का आवागमन बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ है। इसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साथी देशों से अपील की थी और दावा किया वे किसी भी हालात में होर्मुज को खुला, सुरक्षित और मुक्त रखेंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया ट्रुथ सोशल पर अपने एक पोस्ट में लिखा- कई देश जो ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के प्रयास से प्रभावित हैं, अमेरिका के साथ मिलकर उसे खुला और सुरक्षित रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे। हमने ईरान की सैन्य क्षमता को शत प्रतिशत नष्ट कर दिया है, लेकिन उसके लिए ड्रोन, बारूदी सुरंग या जलमार्ग में मिसाइल दागना आसान है। उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश, जो इससे प्रभावित हैं, इस क्षेत्र में जहाज भेजेंगे। इस बीच, अमेरिका ईरानी तट पर लगातार बमबारी करेगा और ईरानी नौकाओं और जहाजों को नष्ट करता रहेगा। ट्रंप की इस अपील का असर साथी और नाटो में शामिल देशों पर नहीं पड़ा और अमेरिका पश्चिम एशिया के संघर्ष में अलग-थलग पड़ गया था।

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, हम ईरान में बेहद अच्छा कर रहे हैं… उनके पास दो हफ्ते पहले तक नौसेना थी। अब उनकी कोई नौसेना नहीं बची है। सब समुद्र की तह में है। दो दिनों में 58 जहाजों को नष्ट कर दिया गया। हम उन्हें परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे, क्योंकि अगर उनके पास ये होंगे तो वे उनका इस्तेमाल करेंगे, और हम ऐसा होने नहीं देंगे। 

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पश्चिम एशिया में संघर्ष और सैन्य गतिविधि
यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए थे, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई थी। ईरान के नए सर्वोच्च नेता और अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक संदेश में कहा है कि ईरान अपने मारे गए लोगों का बदला जरूर लेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने की नीति जारी रहेगी और पड़ोसी देशों को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी बंद करनी चाहिए। 

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर ट्रंप प्रशासन का मुकदमा, यहूदी छात्रों के साथ भेदभाव का आरोप
अमेरिका में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के खिलाफ ट्रंप प्रशासन ने बड़ा कानूनी कदम उठाते हुए मुकदमा दायर किया है। आरोप है कि विश्वविद्यालय ने यहूदी और इस्राइली मूल के छात्रों के साथ हो रहे उत्पीड़न और भेदभाव को रोकने में गंभीर लापरवाही बरती। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी सरकार ने अपनी शिकायत में कहा है कि हार्वर्ड ने कैंपस में बन रहे "शत्रुतापूर्ण माहौल" को लेकर "जानबूझकर उदासीनता" दिखाई। आरोप है कि जब पीड़ित छात्र यहूदी या इस्राइली होते थे, तब विश्वविद्यालय ने अपने ही अनुशासनात्मक नियमों को लागू करने में ढिलाई बरती। मुकदमे में सरकार ने यह भी मांग की है कि हार्वर्ड को दी गई अरबों डॉलर की करदाताओं की धनराशि वापस ली जाए। प्रशासन का कहना है कि यदि कोई संस्थान भेदभाव रोकने में विफल रहता है, तो उसे सरकारी फंडिंग का लाभ नहीं मिलना चाहिए।

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