अमेरिका ने क्यूबा पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए नई पाबंदियों का एलान किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ट्रंप प्रशासन के इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि प्रतिबंध क्यूबा की जनता पर नहीं, बल्कि वहां की सत्ता से जुड़े आर्थिक नेटवर्क पर लगाए गए हैं।
नई पाबंदियों का सबसे बड़ा निशाना GAESA बना है, जो क्यूबा की क्रांतिकारी सशस्त्र सेनाओं द्वारा संचालित विशाल कारोबारी समूह है। इसके अलावा कनाडा की कंपनी शेरिट इंटरनेशनल के साथ चल रहे संयुक्त उपक्रम मोआ निकल पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके बाद शेरिट इंटरनेशनल ने क्यूबा से अपना कारोबार समेटने की घोषणा कर दी, जिससे द्वीप देश में उसकी 32 साल पुरानी मौजूदगी समाप्त हो जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रतिबंध क्यूबा की पहले से जर्जर अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकते हैं। क्विंसी संस्थान से जुड़े शोधकर्ता ली श्लेंकर ने कहा कि नई कानूनी शक्तियों के तहत अमेरिका अब तीसरे देशों की कंपनियों और नागरिकों पर भी कार्रवाई कर सकेगा। इसके तहत कंपनियों की अमेरिकी संपत्तियां फ्रीज की जा सकती हैं और उनके निवेशकों तथा कर्मचारियों की अमेरिका यात्रा पर भी असर पड़ सकता है।
1990 के दशक में सोवियत संघ के पतन और अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद क्यूबा की सेना ने इस कारोबारी ढांचे को खड़ा किया था। लंबे समय तक इसका नेतृत्व लुइस अल्बर्टो रोड्रिगेज लोपेज-कालेजा ने किया, जो पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो के दामाद थे। उनके निधन के बाद अनिया गिलर्मिना लास्त्रेस को GAESA का नया प्रमुख बनाया गया, जिन्हें अब अमेरिकी ब्लैकलिस्ट में भी शामिल कर लिया गया है।
वहीं, क्यूबा सरकार ने अमेरिकी प्रतिबंधों को सामूहिक सजा करार दिया है। हवाना का कहना है कि अमेरिका राजनीतिक दबाव बनाने के लिए क्यूबा की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रहा है और इससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।