ट्रंप प्रशासन ने संघीय अपीलीय अदालत की ओर से विभिन्न देशों पर लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी करार देने संबंधी फैसले को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। खास बात यह है कि टैरिफ के अपने फैसले को सही ठहराते हुए ट्रंप ने भारत पर लगाए गए टैरिफ का हवाला दिया।
अपनी याचिका में ट्रंप प्रशासन ने कहा, भारत पर रूसी ऊर्जा उत्पादों की खरीद के लिए टैरिफ लगाया है। ऐसा यूक्रेन में रूस के युद्ध संबंधी राष्ट्रीय आपातकाल से निपटने के लिए गया। याचिका में कहा गया है कि यह युद्धग्रस्त देश में शांति स्थापित करने के राष्ट्रपति के प्रयास का महत्वपूर्ण पहलू है। ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि टैरिफ को गैरकानूनी घोषित करने के अपीलीय कोर्ट के फैसले को खारिज का फैसला जल्द से जल्द सुनाया जाए।
ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत जवाबी टैरिफ और रूसी तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत जुर्माना टैरिफ लगाया है, जिससे भारत पर लगाया गया कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया है। यह 50 फीसदी टैरिफ भारत से अमेरिका को भेजे जाने वाले करीब 55 फीसदी उत्पादों पर लागू किया जा चुका है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर 251 पन्नों की अपील में, ट्रंप प्रशासन ने कहा, राष्ट्रपति ने हाल ही में यूक्रेन में रूस के युद्ध से संबंधित पहले से मौजूद राष्ट्रीय आपातकाल से निपटने के लिए, रूसी ऊर्जा उत्पादों की खरीद के लिए भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (आईईईपीए) शुल्कों को अधिकृत किया है। यह उस युद्धग्रस्त देश में शांति के लिए उनके प्रयास का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
अपील में कहा गया है, इस मामले में अधिकतम दांव लगा हुआ है। राष्ट्रपति और उनके कैबिनेट ने सुनिश्चित किया है कि टैरिफ शांति और अभूतपूर्व आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा दे रहे हैं। टैरिफ से इन्कार करने से हमारा देश प्रभावी सुरक्षा के बिना व्यापार प्रतिशोध का शिकार होगा और अमेरिका को आर्थिक तबाही के कगार पर धकेल देगा। आईईईपीए टैरिफ के कारण, छह प्रमुख व्यापारिक साझेदार और 27 देशों वाला यूरोपीय संघ पहले ही अमेरिका के साथ फ्रेमवर्क समझौता कर चुके हैं, तथा अमेरिका के पक्ष में टैरिफ व्यवस्था को स्वीकार कर चुके हैं और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगभग 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की खरीद और निवेश करने पर सहमत हो चुके हैं।
वाशिंगटन सर्किट अपील कोर्ट ने दिया था ट्रंप को झटका
पिछले सप्ताह, वाशिंगटन स्थित संघीय सर्किट के लिए अमेरिकी अपील न्यायालय ने 7-4 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि दुनिया भर के देशों पर ट्रंप की ओर से लगाए गए व्यापक टैरिफ अवैध हैं। हालांकि, प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट में अपील याचिका दायर करने के लिए 14 अक्तूबर तक का समय दिया। ट्रंप प्रशासन ने बुधवार को ही अपील दायर कर दी है।
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खतरनाक कूटनीतिक शर्मिंदगी होगी
अपील में कहा गया है, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के अनुसार, टैरिफ पिछले कई महीनों से देश की शीर्ष विदेश नीति प्राथमिकताओं में से एक रहे हैं और इन्हें हटाने से खतरनाक कूटनीतिक शर्मिंदगी होगी जबकि अमेरिका को जवाबी कार्रवाई का जोखिम झेलना होगा। इसके कारण चल रही वार्ताएं बीच में ही बाधित हो जाएगी, जिससे अमेरिकी लोगों की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक कल्याण की रक्षा करने की हमारी क्षमता कमजोर हो जाएगी।
चल रही वार्ताएं जोखिम में पड़ जाएंगी
राष्ट्रपति द्वारा आईईईपीए टैरिफ के इस्तेमाल को गैरकानूनी घोषित करने वाले अपील अदालत के खंडित फैसले की ओर इशारा करते हुए ट्रंप प्रशासन ने अदालत को बताया कि यह फैसला उन विदेश वार्ताओं पर अनिश्चितता की चादर डाल देगा जिन्हें राष्ट्रपति पिछले पांच महीनों से टैरिफ के जरिये आगे बढ़ा रहे हैं। इससे पहले से तय किए गए फ्रेमवर्क सौदे और चल रही वार्ता दोनों खतरे में पड़ गए हैं।
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