ट्रंप प्रशासन ने शनिवार को उपभोक्ता वित्तीय सुरक्षा ब्यूरो (सीएफपीबी) के प्रमुख रोहित चोपड़ा को पद से हटा दिया, जिनका कार्यकाल 2026 तक था। चोपड़ा को उपभोक्ता सुरक्षा कानूनों को लागू करने और उनका विस्तार करने के लिए जाना जाता था।
चोपड़ा ने सोशल मीडिया पर अपना इस्तीफा पत्र साझा किया है, जिसमें उन्होंने लिखा कि इस समय जब बहुत अधिक शक्ति कुछ हाथों में सिमट गई है, ऐसे में सीएफपीबी जैसे एजेंसियां और भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद तुरंत हटाए जाने की उम्मीद थी। लेकिन वे दो हफ्तों तक बने रहे और इस दौरान उन्होंने दो मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाना और कई रिपोर्ट जारी करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए।
सीएफपीबी को 2011 में बनाया गया था। इस इस तरह से स्थापित किया गया था कि यह राजनीति से प्रभावित न हो। यानी इसके कामकाज पर राजनीतिक बदलावों का असर न हो। लेकिन 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया का राष्ट्रपति इस एजेंसी के प्रमुख को बिना कारण बताए हटा सकते हैं।
रोहित चोपड़ा का काम वॉल स्ट्रीट के लिए काफी परेशानी की वजह बना। उन्होंने उपभोक्तां के हितों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाए थे। उन्होंने बैकों से ओवरड्राफ्ट फीस (जब खाते में पैसे कम होते हैं तो बैंक जो अतिरिक्त शुल्क लगाता है) को कम करने को कहा। इसके अलावा, उन्होंने वेल्स फार्गो बैंक को 2022 में ग्राहकों को हुए नुकसान के लिए दो अरब डॉलर चुकाने का आदेश भी दिय।
इसके अलावा, उन्होंने बड़ी तकनीकी कंपनियों की उपभोक्ता भुगतान सेवाओं और डाटा के उपयोग पर सख्त नियम बनाए, जिसे बैंकों और व्यापार समूहों ने सराहा। हालांकि, कुछ उनके अन्य फैसलों का विरोध करते थे। अब सीएफपीबी का संचालन उसकी उप-निदेशक जिक्स्टा मार्टिनेज करेंगी, जब तक ट्रंप एक नया प्रमुख नियुक्त नहीं करते।