कोरोना महामारी के बीच ट्रेनों में सफर खतरे से खाली नहीं है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ट्रेन में कोरोना संक्रमित यात्रा कर रहा है तो दो घंटे की यात्रा के दौरान वो आठ फुट की दूरी पर बैठे सहयात्री को वायरस दे सकता है। अगर आप एक घंटे की ट्रेन यात्रा करते हैं तो आपको दूसरे यात्री से कम से कम तीन फुट दो इंच दूर बैठना होगा।
ऐसा करने से वायरस आपके पास नहीं आ पाएगा। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेंप्टन के वर्ल्डपॉप प्रोजेक्ट के तहत वैज्ञानिकों ने चीन की हाईस्पीड ट्रेनों में ये अध्ययन किया है। वर्ल्डपॉप के निदेशक प्रो. एंडी टैटेम का कहना है कि सोशल डिस्टेंसिंग ही नहीं बल्कि यात्रा कितनी देर की है, इस पर भी संक्रमण की चपेट में आना निर्भर करता है।
संक्रमित व्यक्ति के सामने वाली सीट पर बैठे व्यक्ति को संक्रमण का खतरा सबसे अधिक है। 3.5 फीसदी यात्री अपने संक्रमित सहयात्री की चपेट में आ सकते हैं। एक ही लाइन में सीट पर बैठे व्यक्तियों को ये खतरा 1.5 फीसदी है।
एक लाइन में बैठे लोगों को कम खतरा
मास्क और सैनिटाइजर जरूरी
वैज्ञानिकों ने ट्रेन या दूसरे सार्वजनिक वाहनों से यात्रा करने वाले लोगों को यात्रा के दौरान नियमित मास्क पहनने की सलाह दी है। हाथों को समय-समय पर सैनिटाइज करना होगा। संभव हो तो यात्रा के दौरान कुछ खाएं-पीएं नहीं। छोटे बच्चों के साथ यात्रा करनें से बचें। यात्रा के दौरान चेहरे पर हाथ बिलकुल न लगाएं। वायरस इस लापरवाही का लाभ उठाकर शरीर के भीतर दाखिल हो सकता है।
भारत में ऐसे मामले सामने आए हैं
20 मई को 1,500 यात्रियों को मुंबई से हरिद्वार पहुंची श्रमिक स्पेशल ट्रेन में एक साथ 87 यात्रियों में कोरोना की पुष्टी हुई थी। 13 मार्च को दिल्ली से आंध्र प्रदेश पहुंची आंध्र प्रदेश संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में आठ यात्रियों में कोरोना की पुष्टी हुई थी। 16 मार्च को मुंबई से जबलपुर पहुंची गोदान एक्सप्रेस के चार यात्रियों में कोरोना की पुष्टि हुई थी। ये हाल तब था जब ट्रेनों में उस वक्त सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा था।