अमेरिका में भी नई नीति का विरोध
अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स ने कहा है कि अपने मकसद को पाने के लिए अमेरिकी लोगों के इस्तेमाल वाली रोजमर्रा की चीजों पर शुल्क बढ़ाना सही नहीं है क्योंकि अधिकांश रोजमर्रा की चीजें चीन से ही आती हैं।
अर्थशास्त्री जोसेफ ब्रसलस ने कहा कि अमेरिका में चीनी उत्पादों की कीमत बढ़ने से निर्माण उद्योगों और अमेरिकियों के दैनिक जीवन पर असर पड़ेगा। इन्हें नियंत्रित करने के लिए दूसरे देशों का सहारा लेना होगा और दूसरे देशों को कई रियायतें देनी होंगी। इससे अमेरिका की साख गिरेगी।
आर्थिक मंदी की कगार पर विश्व
अमेरिका यदि इसी तरह की कारोबारी नीति पर आगे बढ़ता है तो दूसरे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले जापान और यूरोपीय देश भी नेशन फर्स्ट की नीति पर काम शुरू कर देंगे। ऐसे में अमेरिका और चीन के बीच शुरू हुए कारोबारी युद्ध की आंच कई देशों तक फैल जाएगी और इसमें फंसे देशों के साथ दूसरे देशों की व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। इससे कई देशों की राष्ट्रीय आय कमजोर होगी। यदि दो देशों का यह कारोबारी युद्ध लंबा खिंचा तो दुनिया एक और मंदी की तरफ बढ़ सकती है।