एक तरफ वाशिंगटन में अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर पर दो दिनी वार्ता चल रही है और दूसरी तरफ राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार की सुबह चीन के साथ अपने व्यापार युद्ध को बढ़ा दिया है। उन्होंने चीन के 200 अरब डॉलर के माल पर आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ाते हुए बीजिंग से होने वाले हर तरह के आयात पर कर थोप दिया है। इसके चलते चीनी माल की कीमत 10 से 25 प्रतिशत तक उछल गई है।
शुक्रवार से चीन के 200 अरब डॉलर के उत्पादों पर अमेरिका द्वारा दोगुने से भी अधिक का आयात कर लगाने के बाद यह शुल्क 10 से बढ़कर 25 फीसदी हो गया है। इसी साल की शुरुआत में 200 अरब डॉलर के ही चीनी उत्पाद (मछली, हैंडबैग्स, कपड़े और जूते) पर ट्रंप ने 10 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था। ट्रंप ने यह कदम ऐसे वक्त में उठाया है जब दोनों देशों के उच्च स्तरीय अधिकारियों के बीच ट्रेड समझौते की वार्ता चल रही है।
वार्ता में चीन की तरफ से उप प्रधानमंत्री लियू हे और अमेरिका की तरफ से व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइथनाइजर तथा वित्तमंत्री स्टीवन नुचिन शामिल हैं। चीन के वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता गाओ फेंग ने कहा, हमें इस कदम का गहरा खेद है और हम जल्द ही इसका जवाब देंगे। उन्होंने कहा, चीन को उम्मीद है कि अमेरिका दोनों देशों के हितों का ख्याल रखते हुए व्यापारिक वार्ता को सफल होने देगा।
विश्व स्तर पर पड़ेगा बुरा असर : आईएमएफ
अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी है कि जल्द ही वह 325 अरब डॉलर के चीनी उत्पाद पर भी 25 फीसदी शुल्क लगा सकता है। जबकि चीन ने भी कहा कि वह अपने हक की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध और काबिल है। इससे हालात और भी खराब हो सकते हैं। इस व्यापार युद्ध से पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी का साया मंडराने लगा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी चेताया है कि इसका वैश्विक स्तर पर बुरा असर पड़ेगा।
डील के करीब थे दोनों, लेकिन चीन ने दोबारा सौदेबाजी शुरू की : ट्रंप
वाशिंगटन। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और चीन व्यापार समझौता करने के ‘बहुत करीब’ पहुंच चुके थे लेकिन बीजिंग ने इस बारे में फिर से सौदेबाजी शुरू कर दी, हम ऐसा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि यह कदम चीन को रोकने के लिए जरूरी था। ट्रंप ने अपने निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि उनके देश को शुल्क से एक साल में 120 अरब डॉलर मिल सकते हैं जिसमें से अधिकतर चीन चुकाता है।