इस्लामाबाद हाईकोर्ट से अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को झटका लगा है। अदालत ने तोशखाना भ्रष्टाचार मामले में नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) के कॉल-अप नोटिस के खिलाफ इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की याचिकाओं को खारिज कर दिया। द न्यूज इंटरनेशनल ने बताया कि इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आमिर फारूक और न्यायमूर्ति बाबर सत्तार की दो सदस्यीय पीठ ने गुरुवार को याचिकाओं को अप्रभावी घोषित कर दिया।
क्या है मामला?
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के प्रमुख इमरान खान पर प्रधानमंत्री के रूप में स्टेट डिपॉजिटरी यानी तोशाखाना से रियायती मूल्य पर प्राप्त एक महंगी ग्राफ कलाई घड़ी सहित अन्य उपहार खरीदने और लाभ के लिए उन्हें बेचने का आरोप है। यह मामला इमरान के प्रधानमंत्री रहते हुए शुरू हुई थी। इमरान खान को आधिकारिक यात्राओं के दौरान करीब 14 करोड़ रुपये के 58 उपहार मिले थे। इन महंगे उपहारों को तोशाखाना में जमा किया गया था। बाद में इमरान खान ने इन्हें तोशखाने से सस्ते दाम पर खरीद लिया और फिर महंगे दाम पर बाजार में बेच दिया। इस पूरी प्रक्रिया के लिए उन्होंने सरकारी कानून में बदलाव भी किए।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इमरान ने 2.15 करोड़ रुपये में इन गिफ्ट्स को तोशखाने से खरीदा था और इन्हें बेचकर 5.8 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया। इन गिफ्टस में एक ग्राफ घड़ी, कफलिंक का एक जोड़ा, एक महंगा पेन, एक अंगूठी और चार रोलेक्स घड़ियां भी थीं। बिक्री का विवरण साझा नहीं करने के कारण उन्हें पिछले साल अक्तूबर में पाकिस्तान के चुनाव आयोग द्वारा अयोग्य घोषित कर दिया गया था। चुनाव निकाय ने बाद में देश के प्रधानमंत्री के रूप में प्राप्त उपहारों को बेचने के लिए आपराधिक कानूनों के तहत उन्हें दंडित करने के लिए जिला अदालत में शिकायत दर्ज करवाई थी।
नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो को संशोधित कानून के अनुसार खान और उनकी पत्नी के खिलाफ अपनी जांच जारी रखने का निर्देश देते हुए इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आमेर फारूक ने कहा कि अदालत एनएबी को कार्रवाई करने और जांच करने से नहीं रोक सकती है।
अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कुछ वर्षों में आतंकवादियों के फिर से संगठित होने के मामले की जांच की मांग करते हुए पाकिस्तानी राष्ट्रपति आरिफ अल्वी, अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान और खुफिया एजेंसी आईएसआई के पूर्व प्रमुख फैज हमीद और अन्य के खिलाफ एक याचिका दायर की गई है। याचिका में एक न्यायिक आयोग के गठन की मांग की गई है जो यह जांच करेगा कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पिछले कुछ वर्षों में आतंकवादी कैसे फिर से बसे और संगठित हुए।
द न्यूज इंटरनेशनल अखबार ने बताया कि पेशावर हाईकोर्ट (पीएचसी) में गुरुवार को अवामी नेशनल पार्टी (एएनपी) द्वारा दायर याचिका में अनुरोध किया गया कि अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में शांति बहाल करने के लिए तत्काल और ठोस उपाय किए जाएं। साथ ही आतंकवादियों के पुनर्वास और देश भर में उग्रवाद को बढ़ने से रोकने की भी मांग की गई है।
एएनपी के प्रांतीय प्रमुख आइमल वली खान ने याचिका में इमरान खान, राष्ट्रपति अल्वी, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) हमीद, पूर्व मुख्यमंत्री महमूद खान और खैबर पख्तूनख्वा सरकार के पूर्व प्रवक्ता बैरिस्टर सैफ को नामित किया है और मामले की जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन की मांग की।
याचिका में संघीय और प्रांतीय सरकारों को भी पक्षकार बनाया गया है। साथ ही यह पता लगाने के लिए पीएचसी के मुख्य न्यायाधीश से न्यायिक जांच की मांग की गई है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रांत में तालिबान को फिर से बसाने में किसने मदद की। याचिका में कहा गया है कि पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के महान बलिदानों के साथ-साथ एएनपी सरकार के प्रयासों और बलिदानों के बाद इस प्रांत में शांति बहाल हुई। रिट याचिका में आतंकवादियों के फिर से संगठित होने और प्रांत और देश के बाकी हिस्सों में आतंकवाद के खतरे को और फैलने से रोकने के उपायों की भी मांग की गई है।