टोक्यो ओलंपिक्स के आयोजकों ने बुधवार को फिर एलान किया कि इन खेलों को स्थगित नहीं किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि सुरक्षित माहौल में सभी खेल संपन्न होंगे। लेकिन इन दावों पर यहां ज्यादा लोगों को भरोसा नहीं है। बल्कि अब मीडिया में ये चर्चा शुरू हो गई है कि अगर इन खेलों को रद्द किया गया, तो उसका क्या असर होगा।
गौरतलब है कि अब खेल में दस हफ्ते भी नहीं बचे हैं, लेकिन टोक्यो और जापान के दूसरे इलाकों में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण आपातकाल जारी है। दो रोज पहले कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने राष्ट्रीय स्तर पर आपातकाल घोषित करने का सुझाव दिया। इस बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों और बड़े व्यापारियों के साथ-साथ आम जनता की तरफ से भी इन खेलों को रद्द करने की मांग तेज होती जा रही है। छह हजार डॉक्टरों की नुमाइंदगी करने वाला टोक्यो मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन एक पत्र लिख कर इन खेलों को रद्द करने की मांग कर चुका है। उस पत्र पर साढ़े तीन लाख लोगों ने ऑनलाइन दस्तखत कर उसे अपना समर्थन दिया। इसी तरह जापान की प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनी राकुतेन के सीईओ ने एक सार्वजनिक बयान में कहा कि मौजूदा हालात में ओलिंपिक खेलों का आयोजन आत्महत्या करने जैसा होगा।
ओलिंपिक खेलों की शुरुआत अगली 23 जुलाई को होनी तय है। लेकिन अब यहां खेलों से ज्यादा चर्चा इसे रद्द कराने की उठ रही मांगों की है। कहा गया है कि खेलों के आयोजन के लिए करार अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (ओआईसी) और टोक्यो शहर के बीच हुआ था। आईओसी ओलंपिक्स में आने वाले खिलाड़ियों और अधिकारियों की सुरक्षा के लिए बढ़ रही चिंता के आधार पर वो करार रद्द करने में सक्षम है। ऑस्ट्रेलियाई कानून विशेषज्ञ जैक एंडरसन ने टीवी चैनल सीएनएन से कहा है कि खेलों का आयोजन रद्द करने के रास्ते में कानूनी प्रावधान कोई रुकावट नहीं हैं। बल्कि यह राजनीतिक फैसले की बात है। ये निर्णय जापान सरकार को लेना है।
लेकिन खेलों के रद्द होने के साथ प्रसारण अधिकार और प्रायोजकों के साथ हुए करार का मसला भी उठेगा। उनके साथ बीमा का बड़ा मुद्दा सामने आएगा। प्रायोजकों और ब्रॉडकास्टर्स को होने वाले नुकसान की भरपाई बीमा कंपनियों को करनी पड़ सकती है। एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक ओलिंपिक खेल रद्द हुए तो बीमा कंपनियों को दो से तीन अरब डॉलर तक का भुगतान करना पड़ सकता है। किसी वैश्विक आयोजन के रद्द होने से इतना बड़ा भुगतान इसके पहले कभी बीमा कंपनियों को नहीं करना पड़ा है।
जानकारों का कहना है कि बीमा कंपनियों से रकम मिलने के बावजूद आयोजकों को नुकसान का एक बड़ा हिस्सा खुद झेलना होगा। खासकर आईओसी को क्षति होगी, जिसके लिए आमदनी का सबसे बड़ा स्रोत चार साल पर होने वाले ग्रीष्मकालीन ओलिंपिक खेल ही होते हैँ। एंडरसन ने कहा- ओलिंपिक्स एक बहुआयामी आयोजन है। इसका संबंध कई क्षेत्रों से होता है। इसलिए खेलों के रद्द होने का असर उन सभी संबंधित क्षेत्रों पर पड़ेगा। सिर्फ बीमा रकम से उन सभी नुकसानों की भरपाई नहीं हो सकेगी।
एथलीट्स को होने वाला नुकसान अलग है। उनके लिए ओलिंपिक खेलों में भाग लेना और वहां करतब दिखाना जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। वर्ल्ड एथलेटिक्स के अध्यक्ष सिबैस्टियन को ने पिछले हफ्ते कहा था कि जो खिलाड़ी टोक्यो जाने की तैयारी कर रहे हैं, उनमें 70 फीसदी के लिए खेल के सर्वोच्च मंच पर प्रदर्शन करने का जीवन में मिलने वाला यह अकेला मौका होगा। खेल रद्द होने से उन्हें जो मायूसी होगी, उसका अंदाजा दूसरे लोग नहीं लगा सकते।