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तुर्की में सोशल मीडिया पर कसा शिकंजा, संसद में बना कानून

Thu, 30 Jul 2020 06:49 AM IST
अवधेश कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्तांबुल
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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तुर्की की संसद में बुधवार की सुबह एक ऐसे कानून को मंजूरी दे दी है जो सेंसरशिप की बढ़ती चिंताओं के बावजूद अधिकारियों को सोशल मीडिया को विनियमित करने की ज्यादा शक्ति प्रदान करती है। इस कानून के बाद सोशल मीडिया के देश की सरकार के हाथ में चले जाने की संभावना बढ़ जाएगी। इस कदम को मानवाधिकार संगठनों ने ऑनलाइन सेंसरशिप करार दिया है।
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तुर्की की संसद में पारित इस कानून के बाद फेसबुक और ट्विटर जैसी सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफार्म के विरुद्ध आ रही शिकायतों पर बातचीत को लेकर तुर्की में अपने प्रतिनिधि कार्यालयों को रखना जरूरी होगा। यदि सोशल मीडिया कंपनी अपने प्रतिनिधि को नामित करने से इनकार करती है तो उस पर कठोर जुर्माना लगेगा और विज्ञापन प्रतिबंध के साथ कंपनी की बैंडविड्थ में कटौती की जाएगी। 

अदालत के फैसले के साथ बैंडविड्थ में 50 फीसदी और फिर 90 फीसदी तक की कटौती की जा सकेगी ताकि सोशल मीडिया नेटवर्क का इस्तेमाल बेहद धीमा हो जाए। प्रतिनिधि को 48 घंटे के भीतर गोपनीयता और निजी अधिकारों का उल्लंघन करने वाली सामग्री को हटाने या हटाने के लिए आधार देने संबंधी निजी अनुरोधों का जवाब देना होगा। यदि सामग्री को 24 घंटे में नहीं हटाया गया तो कंपनी को जवाबदेह ठहराया जाएगा।
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विपक्षी सांसदों ने जताया विरोध

संसद में सत्तारूढ़ पार्टी के कानूनविद रुमेयस ने कहा कि कानून का उपयोग उन पोस्टों को हटाने के लिए किया जाएगा जिनमें साइबर हमला और महिलाओं के खिलाफ अपमान है। जबकि विपक्षी सांसदों ने कहा कि यह कानून देश में अभिव्यक्ति की आजादी को सीमित करेगा जहां मीडिया पहले से ही सरकारी नियंत्रण में है और दर्जनों पत्रकार जेल में हैं। सोशल मीडिया पोस्ट पर भी जांच के बाद कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं।

राष्ट्रपति एर्दोगॉन ने लिया नकेल कसने का संकल्प

राष्ट्रपति एर्दोगॉन ने इस माह की शुरुआत में ही ट्विटर पर अपनी बेटी और दामाद को कथित तौर पर अपमानित किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर नकेल कसने का संकल्प लिया था। ट्विटर पर राष्ट्रपति को तब निशाना बनाया गया जब उन्होंने अपनी बेटी के चौथे बच्चे के जन्म का एलान किया। इसके बाद उन्होंने ऐसा कानून लाने का संकल्प लिया, जो सोशल मीडिया कंपनियों बेलगाम होने से रोक सके।

सामग्री हटाने की मांग करने वाले देशों में तुर्की नंबर वन

ट्विटर की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 की पहली छमाही के लिए सामग्री हटाने की मांग करने वाले 6000 देशों में तुर्की पहले स्थान पर है। करीब 3 साल बाद ऑनलाइन एनसाइक्लोपीडिया विकिपीडिया पर से तुर्की ने जनवरी में प्रतिबंध हटा लिया। तुर्की ने 2014 में ट्विटर और यूट्यूब को उस वक्त ब्लॉक कर दिया था जब राष्ट्रपति तत्कालीन प्रधानमंत्री के खिलाफ ऑडियो रिकॉर्डिंग पोस्ट की गई थी।
 
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