सिंगापुर में फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन करने के मामले में भारतीय मूल की एक महिला समेत तीन महिला एक्टिविस्ट को दोषी ठहराया गया है। अदालत ने प्रत्येक पर 2,341 अमेरिकी डॉलर (करीब 2.2 लाख रुपये) का जुर्माना लगाया है। यह फैसला उस समय आया जब हाई कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा दी गई बरी करने की राहत को पलट दिया।
स्ट्रेट्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, मलय मूल की मोस्सम्मद सोबिकुन नाहर (26), सिटी अमीरा मोहम्मद असरोरी (30) और भारतीय मूल की अन्नामलाई कोकिला पार्वती (37) पर 2 फरवरी 2024 को राष्ट्रपति भवन इस्ताना के बाहर एक जुलूस आयोजित करने का आरोप था। यह क्षेत्र सिंगापुर के सार्वजनिक व्यवस्था कानून के तहत प्रतिबंधित क्षेत्र माना जाता है।
हाई कोर्ट के न्यायाधीश सी की ओन ने अभियोजन पक्ष की अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि तीनों महिलाओं को यह समझ होना चाहिए था कि वे जिस मार्ग से जुलूस निकाल रही हैं, वह प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है। अदालत ने माना कि निचली अदालत ने मामले के मेंटल एलिमेंट यानी इरादे से जुड़े कानूनी परीक्षण को सही ढंग से लागू नहीं किया।
इससे पहले अक्तूबर 2025 में जिला अदालत ने तीनों महिलाओं को बरी कर दिया था। जिला जज जॉन एनजी ने अपने फैसले में कहा था कि हालांकि महिलाओं ने जुलूस निकाला, लेकिन उन्हें यह उचित रूप से पता नहीं था कि वह इलाका प्रतिबंधित है। उन्होंने कहा था कि आरोप साबित करने की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की है, जिसमें शारीरिक कृत्य के साथ मानसिक तत्व भी शामिल है।