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इस बार भी ओली को हटाने को लेकर सहमति बनाने में कामयाब नहीं हो पाया प्रचंड गुट

Sat, 27 Jun 2020 07:34 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडू

सार

  • प्रधानमंत्री निवास पर हुई पार्टी की बैठक से गायब रहे पीएम ओर पार्टी के मुखिया ओली
  • विरोधियों ने उठाए कई सवाल, लेकिन ओली अपने रुख पर कायम, अभी पद छोड़ने का वक्त नहीं
  • पहले भी कह चुके हैं ओली कि वह इस्तीफा दे देंगे, लेकिन कोरोना संकट से देश के निकलने के बाद   
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Nepal PM KP Sharma Oli - फोटो : Social Media
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विस्तार
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नेपाल के प्रधानमंत्री और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव केपी शर्मा ओली आखिर अपनी ही पार्टी की अहम बैठक से क्यों दूर भाग रहे हैं। लंबे समय से बैठक बुलाने की मांग करने वाले उनके सहयोगी और समकक्ष नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड के दबाव पर तीन दिनों तक चलने वाली यह बैठक हो तो रही है, लेकिन इसमें प्रधानमंत्री ओली किसी न किसी बहाने शामिल नहीं हो रहे हैं।

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13 मई को भी पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक ओली की व्यस्तता की वजह से स्थगित हो गई थी। इस बार भी प्रचंड और माधव कुमार नेपाल के दबाव पर यह बैठक बुलाई, तो गई और यहां तक कि इसे प्रधानमंत्री निवास बालूवाटार में ही रखा गया, लेकिन यहां भी ओली अपनी व्यस्तताओं का हवाला देकर नहीं आए।

ओली को हटाने की मुहिम लंबे समय से चल रही है और पार्टी की 45 सदस्यीय स्थाई समिति में कहा ये जाता है कि ओली अल्पमत में हैं, इसके बावजूद पार्टी के मुखिया होने और देश की बागडोर संभालने के नाते ओली अपने तमाम विरोधियों पर हर बार भारी पड़ जाते हैं।
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इस बार भी यही हुआ और उन्हें पद छोड़ने के लिए मजबूर करने की कोशिश में लगा गुट फिलहाल कामयाब नहीं हो पाया है।

हालांकि अब भी प्रचंड समर्थक एक नेता और पार्टी के स्थाई समिति के सदस्य का मानना है कि प्रचंड भले ही ओली को हटाने की मुहिम चला रहे हों, लेकिन अभी तक यही तय नहीं हो पाया है कि अगर पार्टी ओली को प्रधानमंत्री पद से हटा भी देती है तो उनकी जगह कौन लेगा प्रचंड या फिर माधव कुमार नेपाल।

माना यही जा रहा है कि प्रचंड खुद प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं और अपनी मंशा खुद जाहिर करने के बजाय माधव नेपाल को आगे कर देते हैं, लेकिन उन्हें ये डर भी है कि अगर माधव को ये जिम्मेदारी मिल गई तो उनका क्या होगा।

उन्हें पता है कि अभी माधव नेपाल उनका सहारा लेकर कुर्सी पर बैठ जाएंगे, लेकिन बाद में वह भी ओली की ही तरह मनमानी कर सकते हैं।

पार्टी सूत्रों का मानना है कि प्रधानमंत्री ओली इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि उन्हें हटाने के लिए विरोधी गुट पार्टी के भीतर ही कई तरह की चालें चल रहा है।

लेकिन वो ये भी जानते हैं कि अभी विरोधियों में ही प्रचंड को लेकर एकता नहीं है और खुद विरोधी खेमा आपस में बंटा हुआ है, ऐसे में वो बेफिक्र होकर तमाम आरोपों को झेलते हुए अपने काम में लगे हैं।

इससे पहले भी वो ये कह चुके हैं कि अभी ये संकट का दौर है और ऐसे में पार्टी के अंदरूनी मतभेद सामने आने से सरकार के प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ेगा।

वे बार बार ये भी कह चुके हैं कि वो इस्तीफा देने को राजी हैं, लेकिन थोड़े दिन बाद स्थितियां सामान्य होने पर।

बावजूद इसके उन्होंने अपने निवास पर ही पार्टी नेताओं का सम्मान करते हुए बैठक करने को कहा और ये भी बताया कि अगर उनके पास वक्त होगा तो वो शामिल हो जाएंगे।

इस बीच उनकी गैर-मौजूदगी में पार्टी नेताओं ने देश के तमाम संकटों और सवालों पर चर्चा की - चीन की घुसपैठ और नेपाली जमीन पर कब्जे का मामला हो या कोविड-19 में सरकार की नाकामी का, भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप हों या पार्टी से पूछे बगैर लिए जाने वाले ओली के फैसलों का – लेकिन ओली के पद छोड़ने को लेकर फिलहाल कोई फैसला नहीं हो सका।
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उनके दोनों पदों पर बने रहने को लेकर तमाम एतराजों के बावजूद अभी प्रचंड गुट को कामयाबी नहीं मिल पाई है।

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