2017 में समंदर का तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा, जिससे पूरा पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में पड़ गया। चीन विज्ञान अकादमी (सीएएस) के हालिया शोध में यह दावा किया है। इस अध्ययन के लिए 2017 में दुनिया भर के समंदर के ऊपरी दो किलोमीटर के पानी में मौजूद ऊष्मा की 2015 की ऊष्मा से तुलना की गई। पाया गया कि 2017 के पानी में ऊष्मा की बढ़ोतरी पूरे चीन में 2016 में इस्तेमाल हुई बिजली से 600 गुना ज्यादा थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि अटलांटिक और अंटार्कटिका में तापमान सबसे ज्यादा बढ़ा।
शोधकर्ताओं के मुताबिक समुद्र के बढ़ते तापमान से पारिस्थितिकी मंत्र खतरे में पड़ गया है, मूंगा चट्टानों और उसमें रहने वाले जीव संकट में हैं। पानी गर्म होने से समुद्र जल स्तर भी बढ़ेगा। बर्फीले समुद्र और ग्लेशियर पिघलेंगे। समुद्री लहरों पर भी प्रभाव पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक समुद्र में मौजूद गर्मी जलवायु परिवर्तन का महत्वपूर्ण संकेत है। ऐसा समंदर की ज्यादा गर्मी अवशोषित करने की क्षमता के कारण होता है। समुद्र का पानी ग्लोबल वार्मिंग की 90 फीसदी गर्मी सोखता है।
धरती के लिए भी दूसरा सबसे गर्म साल रहा
नासा ने एक अन्य रिपोर्ट में दावा किया है कि 2017 अब तक का दूसरा सबसे गर्म साल रहा। हालांकि यह 2016 से थोड़ा कम गर्म रहा, लेकिन ध्यान रखने की बात है कि उस साल अल नीनो का भी प्रभाव था। इस लिहाज से 2017 बिना अल नीनो प्रभाव वाला अब तक का सबसे गर्म साल रहा। वैज्ञानिकों की मानें तो खतरा यह नहीं है कि 2017 गर्म रहा। खतरनाक यह है कि गर्मी लगातार बढ़ रही है। 1850 के बाद सबसे गर्म 18 साल की सूची बनाई जाए तो 17 साल इसी शताब्दी के होंगे।