पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पर आपराधिक मुकदमा चलाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। छह जनवरी 2021 की घटना की जांच करने वाली अमेरिकी कांग्रेस (संसद) की कमेटी ने उन्हें ‘लोकतंत्र के खिलाफ अपराध’ करने का दोषी ठहराया है। छह जनवरी 2021 को ट्रंप के समर्थकों ने कैपिटॉल हिल (संसद भवन) पर उस समय हमला बोल दिया था, जब वहां 2020 में हुए राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे को प्रमाणित करने की प्रक्रिया चल रही थी। ट्रंप समर्थकों का मकसद चुनाव परिणाम को पलट कर ट्रंप को विजयी घोषित करवाना था।
कांग्रेस की जांच समिति के इस फैसले के राजनीतिक परिणामों पर अब कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ टीकाकारों की राय यह है कि इससे ट्रंप के पक्ष में उनके समर्थकों की नए सिरे से गोलबंदी हो सकती है। यह अंदेशा भी है कि ट्रंप समर्थक धुर दक्षिणपंथी गुट ‘पूर्व राष्ट्रपति को सताए जाने’ से नाराज होकर हिंसक गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। ट्रंप की पहचान पूर्व राष्ट्रपति के साथ-साथ एक धनी व्यापारी, गोल्फ खिलाड़ी और डिजिटल मीडिया के स्टार भी है। अभी भी उनके समर्थकों की एक मजबूत जमात है, जिनके बीच उनकी देवता जैसी छवि है।
कांग्रेस की जांच समिति ने ट्रंप को दोषी पाते हुए अब यह मामला न्याय मंत्रालय को भेजने का फैसला किया है। इस समिति ने छह जनवरी की घटना के बाद जांच शुरू की थी। इस दौरान 10 सार्वजनिक सुनवाइयां हुईं। उसके अलावा हजारों लोगों से पूछताछ की गई और लाखों दस्तावेजों की जांच समिति ने कराई। अमेरिकी सियासी हलकों में पहले से आम चर्चा थी कि समिति ट्रंप के खिलाफ निष्कर्ष पर पहुंचेगी।
अखबार द गार्जियन ने अपने एक विश्लेषण में कहा है कि ट्रंप को जिन आरोपों में दोषी पाया गया है, वे अमेरिकी इतिहास में अभूतपूर्व हैं। इससे अमेरिका का इतिहास कलंकित हुआ है। अब आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास मे एक ऐसे राष्ट्रपति के बारे में भी पढ़ेंगी, जिस पर कांग्रेस की कार्यवाही में बाधा डालने, धोखाधड़ी करने, झूठे बयान देने, और विद्रोह के लिए भीड़ को उकसाने और उसमें सहायक बनने के इल्जाम लगे।
अमेरिकी मीडिया में जांच समिति की कार्यवाहियों की तुलना किसी रोमांचक अपराध कथा या क्राइम पॉस्टकास्ट से की गई है। टीकाकारों ने कहा कि उन कार्यवाहियों के दौरान ऐसी बातें सामने आती रहीं, जिन्हें पहले अमेरिका में असंभव माना जाता था।
कांग्रेस की जांच समिति ने जब सोमवार को अपना निर्णय सुनाया, तब 74 फीट लंबा और 54 फीट चौड़ा कमरा पत्रकारों और फैसला सुनने आए लोगों से खचाखच भरा था। इसके पहले इस कमरे में 1950 के दशक में भी कुछ ऐसी गतिविधियों की सुनवाई हुई थी, जिन्हें तब ‘अन-अमेरिकन’ (गैर-अमेरिकी) माना गया था। लेकिन तब उन सुनवाइयों के बाद तैयार रिपोर्ट को प्रकाशित नहीं किया गया था।
जब निष्कर्ष सुनाए गए, तब समिति के चेयरमैन बेनी थॉम्पसन ने इस मौके पर अमेरिका वासियों को चेतावनी दी कि ‘देश अभी भी विचित्र और अनिश्चित स्थिति’ में है। उन्होंने आगाह किया कि अगर अमेरिका को कानून और लोकतंत्र पर आधारित एक राष्ट्र के रूप में जीवित रहना है, तो उसे सुनिश्चित करना होगा कि छह जनवरी जैसी घटना फिर कभी ना हो।