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फ्लाई विद मी: इनडोर स्काईडाइविंग से दूर कर रहे यह बड़ी बीमारी, रूस ने निकाला इलाज का अनोखा तरीका

Tue, 11 May 2021 03:07 PM IST
प्रियंका तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को

सार

रूस में सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों के इलाज में एक नायाब तकनीक इनडोर स्काईडाइविंग का सहारा लिया जा रहा है।    
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इनडोर स्काईडाइविंग सिम्युलेटर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सेरेब्रल पाल्सी, एक ऐसी बीमारी जो बच्चों के जन्म के पहले तीन सालों में मस्तिष्क में क्षति के कारण होती है। इसकी वजह से मांसपेशियां मस्तिष्क से सामंजस्य नहीं बिठा पाती हैं और इसी से अपंगता होती है। यह एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है जो बच्चों की शारीरिक गति, चलने-फिरने की क्षमता को प्रभावित करता है। दुनियाभर में एक करोड़ से भी ज्यादा बच्चे इस बीमारी से ग्रसित हैं। इसके इलाज को लेकर रूस से एक सकारात्मक खबर सामने आई है। दरअसल, रूस में सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों के इलाज में एक नायाब तकनीक इनडोर स्काईडाइविंग का सहारा लिया जा रहा है। 

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‘फ्लाई विद मी’ परियोजना से बच्चों को मिल रही सहायता
बता दें, रूस में लगभग 85 हजार बच्चे सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित हैं। इन्हीं बच्चों में से एक 13 साल के मैरीन डोलिक को रूस की ‘फ्लाई विद मी’ परियोजना में भाग लेने के लिए चुना गया है। इस परियोजना के तहत सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों को उनकी शारीरिक क्षमताओं में सुधार करने में मदद की जाती है। इसके लिए डोलिक को इनडोर स्काईडाइविंग सिम्युलेटर में उड़ने की ट्रेनिंग दी जा रही है। सिम्युलेटर में उड़ानें से बच्चों के जोड़ों और मांसपेशियों को काम करने में मदद मिलती है। 

ट्रेनिंग मिलने से बच्चे में हुआ सुधार 
तीन हफ्ते की ट्रेनिंग के बाद डोलिक ने कहा, 'मैंने अब ठीक से चलना सीख लिया है। मैं मजबूत हो गया हूं और धैर्य से सभी काम करता हूं। मैं किसी की मदद के बिना अपने दम पर बहुत कुछ करना चाहता हूं।' डोलिक ने बताया कि बड़े होकर वह इनडोर स्काईडाइविंग प्रशिक्षक बनना चाहता है। वहीं, डोलिक की मां इरीना ने कहा कि ट्रेनिंग मिलने के बाद उनके बेटे में बहुत सुधार दिख है। 
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पुराना हुआ मालिश से इलाज का तरीका
गौरतलब है कि यूरोप और अमेरिका में ऐसे बच्चों के लिए इलाज के लिए बहुत पहले से स्काईडाइविंग की मदद ली जा रही है। फिजिशियन वालिदा इसानोवा ने कहा कि रूस में सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों का इलाज मालिश से किया जाता रहा है, जो कि अब पुराना हो चुका है, इसका प्रयोग अब कम ही जगहों पर किया जाता है। फिलहाल फ्लाई विद मी प्रोजेक्ट को वैज्ञानिक आधार देने के लिए अभी और अध्ययन की जरूरत है। 

बीमारी से पीड़ित बच्ची की मां प्रोजेक्ट पर कर रहीं काम
इस प्रोजेक्ट को चलाने वाली येकातेरिना इनोजेमेत्सेवा खुद एक सेरेब्रल पाल्सी पीड़ित बच्ची की मां हैं। उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत अब तक 5 से 14 साल के 120 बच्चों को इनडोर स्काईडाइविंग की ट्रेनिंग देने के लिए चुना गया है। उल्लेखनीय है कि सिम्युलेटर स्काईडाइविंग से बच्चों को फायदा तो हो रहा है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस तरह के इलाज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं हैं। इस ट्रेनिंग के लिए लोगों को एक घंटे में 29 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

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