नेपाल की संसद के ऊपरी सदन- नेशनल असेंबली के चुनाव सीटों के लिहाज से विपक्षी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) को तगड़ा झटका लगा। लेकिन कई विश्लेषकों ने कहा है कि इस हार के बावजूद यूएमएल यह दिखाने में सफल रही कि देश में वह सबसे मजबूत ताकत है। इस तरह चुनावी हार में उसने एक तरह की राजनीतिक जीत दर्ज की है।
इन चुनावों में आरंभ में अनुमान लगाया गया था कि यूएमएल को एक भी सीट नहीं मिलेगी। लेकिन प्रांत-1 में क्रॉस वोटिंग के कारण उसका एक उम्मीदवार जीतने में सफल रहा। अगर वोटों के लिहाज से देखें तो पांच दलों के सत्ताधारी गठबंधन के उम्मीदवारों को 4,668 वोट मिले, जबकि अकेले यूएमएल को 4,524 वोट मिले।
ताजा चुनाव नतीजों के बाद यूएमएल पार्टी के चीफ ह्विप विशाल भट्टराई ने कहा कि पार्टी इस बात पर खुश है कि उसे एक सीट मिल गई। उन्होंने कहा- ‘बात सिर्फ प्रांत-1 की नहीं है। हमें मधेस, गंडारी और सुदूर पश्चिम प्रांतों में भी उम्मीद से ज्यादा वोट मिले। हम अकेले लड़ रहे थे, जबकि हमारे खिलाफ पांच पार्टियां लामबंद थीं।’
नेपाली अखबारों में छपी टिप्पणियों से जाहिर है कि कई राजनीतिक पर्यवेक्षक यूएमएल के इस दावे से सहमत हैं। उनके मुताबिक यूएमएल ने इन चुनावों से यह संदेश दिया है कि उसके पास बड़ा समर्थन आधार है और अगले आम चुनाव में वह सत्ता की एक प्रमुख दावेदार होगी।