कोरोना वायरस इटली पर कहर बन कर टूटा है। इस महामारी के चलते इटली में 20,000 से भी ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। हालांकि, आज हम आपको डॉ. रफेल ब्रूनो के अनुभव के बारे में बताने जा रहे हैं। डॉ. रफेल ब्रूनो वहीं डॉक्टर हैं, जिन्होंने इटली में कोरोना के पहले मरीज का इलाज किया था। डॉ. रफेल ब्रूनो सैन माटेओ हॉस्पिटल में इंफेक्शन डिसीज विभाग के प्रमुख हैं। डॉ. ब्रूनो पेरिस में रहते हैं। उन्होंने पहले मरीज को पेशेंट-1 नाम दिया है। डॉ. ब्रूनो के अनुभव को हम आपसे साझा करने जा रहे हैं।
इटली में कोविड-19 का पहला मरीज 38 साल का था, जो दक्षिणी मिलान के कोडोग्नो से आया था। उसमें फ्लू जैसे लक्षण थे। उसकी हालत तेजी से बिगड़ रही थी। हमने टेस्ट किए और 20 फरवरी को वह कोविड-19 पॉजिटिव पाया गया। अगले कुछ दिनों कोडोग्नो और आसपास के इलाकों में लॉकडाउन हो गया। इसके कुछ हफ्तों में यह खतरनाक बीमारी पूरे इटली में फैल गई।
मैं उसका पूरा नाम नहीं बता सकता, इसलिए मैं उसे पेशेंट-1 कहूंगा। हालांकि, पेशेंट-1 का पहला नाम माटिया था। वह कुछ हफ्तों तक वेंटिलेटर पर था और बाद में वह 22 मार्च को ठीक होकर घर भी चला गया। इस दौरान उसने हमें सिखाया कि कैसे जानलेवा वायरस से ठीक हुआ जाता है। जब वह हॉस्पिटल में था, तब उसके पिता की कोरोना वायरस से मौत हो गई। उसकी पत्नी, जो 8 माह के गर्भ से थी, वह भी कोरोना पॉजिटिव पाई गई। हालांकि बाद में वह भी ठीक हो गई।
आधिकारिक रूप से इटली में कोरोना वायरस बीमारी लाने वाला मरीज 25 जनवरी को जर्मनी से आया था, लेकिन मैं दोनों को क्रमशः पेशेंट वन और पेशेंट जीरो कहूंगा। माटिया ठीक जरूर हो गया, लेकिन मैं उससे जुड़े अनुभव को पाथोस की कहानी की तरह लेता हूं, जिसमें जिंदगी-मौत और दर्द-राहत एक-दूसरे से जुड़े थे।
आज जब मैं पेरिस के अपने अपार्टमेंट में पेशेंट-1 के बारे में सोचता हूं, तो लगता है कि उसने यह जरूर सिखाया कि बीमारी से ठीक कैसे होते हैं, लेकिन उसने हमें उन लोगों से दूर भी कर दिया, जिन्हें हम प्यार करते हैं। अब हम आगे रहकर किसी की भी मदद करने से हिचकिचाएंगे, उनसे दूर रहना चाहेंगे। न चाहते हुए भी ये अब हमारी आदत बन जाएगी। असल में, यही वो कीमत है जो हमें चुकानी होगी।’