मंत्री ने कहा कि पायलटों ने विमान की ऊंचाई के बारे में हवाई यातायात नियंत्रण के निर्देशों को नजरंदाज किया। उन्होंने कहा, ‘पायलट और एटीसी दोनों ने प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। पायलट पूरी उड़ान के दौरान कोरोना वायरस के बारे में चर्चा कर रहे थे। उनका ध्यान केंद्रित नहीं था। वे कोरोना वायरस के बारे में, उनके परिवारों के प्रभावित होने के बारे में बातें कर रहे थे। जब नियंत्रण टावर ने पायलट को विमान की ऊंचाई बढ़ाने के लिए कहा तो पायलट ने कहा कि वह संभाल लेगा। यह अतिआत्मविश्वास था।’
सरवर ने कहा कि चालक दल के सदस्य और एटीसी भी इस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार था। उन्होंने कहा, ‘जो भी जिम्मेदार है उसे जवाबदेह बनाया जाएगा। साथ ही वादा किया कि पूर्ण जांच रिपोर्ट एक वर्ष में पेश कर दी जाएगी।'
मंत्री ने कहा कि प्रारंभिक रिपोर्ट में इसका उल्लेख है कि विमान में कोई तकनीकी खामी नहीं थी और पायलटों ने भी इसके बारे में हवाई यातायात नियंत्रक के साथ अपनी बातचीत में भी नहीं कहा है। मंत्री ने कहा कि विमान ने लैंडिंग गियर के बिना ही तीन बार रनवे को छुआ जिससे उसके इंजन को क्षति पहुंची।
उड्डयन मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय विमानन कंपनी के 40 फीसदी पायलट फर्जी लाइसेंस से विमान उड़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन पायलटों ने न तो स्वयं परीक्षा दी है और न ही उन्हें उचित उड़ान अनुभव है। उन्होंने कहा, ‘दुर्भाग्य से पायलटों की नियुक्ति राजनीतिक आधार पर भी होती है।’