आतंकवाद पर संसदीय-अधिकार प्राप्त समिति की वार्षिक रिपोर्ट 2019 में अमेरिका के विदेश विभाग ने कहा कि पाक को मिलने वाली अमेरिकी सहायता पर रोक भी जारी रही। रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जनवरी 2018 में पाकिस्तान को अमेरिका से मिलने वाली सहायता पर लगाया गया प्रतिबंध 2019 में भी जारी रहा।
रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी समूहों और आतंकियों से उत्पन्न खतरे को खत्म करने के काम में पाक सरकार विफल रही थी। जिसे देखते हुए अमेरिकी सरकार ने जनवरी 2018 में पाक को दी जाने वाली अधिकांश सहायता पर रोक लगा दी थी, जिसे अमेरिका ने साल 2019 में भी जारी रखा था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को निशाना बनाने वाले अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क (एचक्यूएन) के साथ भारत को लक्षित करने वाले आतंकी समूहों जैसे लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को अपनी जमीन पर गतिविधियां संचालित करने की अनुमति दी।
अमेरिकी विदेश विभाग ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने जैश के संस्थापक और संयुक्त राष्ट्र के नामित आतंकवादी मसूद अजहर और साल 2008 में हुए मुंबई हमले के 'प्रोजेक्ट मैनेजर' साजिद मीर जैसे अन्य ज्ञात आतंकवादियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। माना जाता है कि ये दोनों पाकिस्तान में आजाद घूम रहे हैं।
हालांकि, पाक ने अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया बहाली में कुछ सकारात्मक योगदान दिया। इसमें तालिबान को हिंसा कम करने के लिए बढ़ावा देने जैसे कदम रहे। पाक ने एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) में ब्लैक लिस्ट होने से बचने के लिए कुछ प्रगति की, लेकिन 2019 में सभी एक्शन प्लान पूरे नहीं किए गए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान उन देशों में से एक है जो आतंकवादियों के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाने हैं। हालांकि, पाक की राष्ट्रीय कार्य योजना यह कहती है कि यहां किसी भी सशस्त्र आतंकी गुट को कार्य करने की अनुमति नहीं है, लेकिन लश्कर, जैश और हक्कानी जैसे नेटवर्क यहां से संचालित होते रहे हैं।