पृथ्वी पर पहली बार कीटों द्वारा पारागण 9.9 करोड़ वर्ष पूर्व किया गया था। यह दावा बर्मा में पेड़ की राल से बने फूल और भौंरे का जीवाश्म के आधार पर अध्ययन किया गया है। इससे पहले माना जाता था कि कीटों द्वारा परागण 5 करोड़ वर्ष पूर्व शुरू हुआ था।
अध्ययनकर्ताओं के अनुसार पराग कणों की खोज आसान नहीं थी। इन्हें भौंरे के बालों के बीच खोजा गया। इसके लिए कॉन-फोकल लेजर माइक्रोस्कोपी तकनीक का उपयोग किया गया। इसमें फ्लोरासेंस लाइट इस्तेमाल होती हैं, जिसकी वजह से पराग कण कीट के गहरे शल्क में अलग से चमकते नजर आते हैं।
राल के जीवाश्म में मिला भौंरा भी नई प्रजाति का है। इसे एंजीमोरडेला बर्मीटीना नाम दिया गया है। उसकी शारीरिक संरचना, पराग कण ग्रहण करने वाले मुंह के हिस्से आदि दर्शाते हैं कि वह परागण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था। इस भौंरे के विश्लेषण के लिए वैज्ञानिकों ने एक्स-रे माइक्रो-कंप्यूटेड टोमोग्राफी तकनीक का उपयोग किया।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह खोज दर्शाती है कि पौधों और जीवों ने एक दूसरे का सहयोग करते हुए अपना विकास किया है। इसे एक सबसे पुराने और सपाट साक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है।