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जलवायु परिवर्तन का असर: आर्कटिक से चली लू ने बढ़ाई गर्मी, सबसे ठंडे प्रांत साइबेरिया में गर्मी ने तोड़ा 120 साल का रिकॉर्ड

Sat, 26 Jun 2021 01:07 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को

सार

रूस और दुनिया का सबसे ठंडा प्रांत साइबेरिया आज जलवायु परिवर्तन के कारण गर्मी की मार झेल रहा है। साइबेरिया में गर्मी ने अबतक 120 सालों का रिकॉर्ड तोड़ा है।
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आर्कटिक - फोटो : social media
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विस्तार
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दुनिया का सबसे ठंडा प्रांत, साइबेरिया में जून में औसत तापमान माइनस 11 डिग्री रहता है। लेकिन इस साल यहां गर्मी ने 120 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है। इसकी वजह यह है कि आर्कटिक की ओर से चली तेज हवाओं ने यहां पर गर्मी का अबतक का सारा रिकॉर्ड तोड़ दिया है और यहां तापमान 48 डिग्री तक पहुंच गया है। 
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यूरोपियन यूनियन अर्थ ऑब्जर्वेशन प्रोग्राम के मुताबिक, गुरुवार को साइबेरिया का वर्कोजैंक्स्क शहर सबसे गर्म शहर रहा। यहां का तापमान 48 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यहां इस कदर गर्मी थी कि लोगों अगर बाहर निकल रहे थे, तो उनकी त्वचा जल रही थी और गर्मी से बचने के लिए शहर में पानी का छिड़काव हो रहा था। 

इतना ही नहीं लोगों को गर्मी से राहत दिलाने के लिए जगह-जगह पर शावर लगाए गए थे। साइबेरिया की आबादी 3.90 करोड़ की है और इस दौरान लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई। इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन रूस को प्रभावित कर रहा है। बता दें कि पूरी दुनिया के मुकाबले रूस ढाई गुना तेजी से गर्म हो रहा है। 
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आर्कटिक क्षेत्र के जंगलों में लगे आगे से हिमखंड पिघल रहे 
जानकारों का कहना है कि अगर हमने जलवायु परिवर्तन को लेकर प्रयास नहीं किया तो दुनिया में बाढ़, सूखा और तूफानों की संख्या बढ़ सकती है। इसके अलावा आर्कटिक क्षेत्र के जंगलों में भी आग लग रही है और यही कारण है कि आर्कटिक क्षेत्र के विशाल हिमखंड भी तेजी से पिघल रहे हैं।
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