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अमेरिका: गहरी सियासी मुसीबतों से घिर गए हैं जो बाइडन, कोरोना ने और बिगाड़े हालात

Wed, 04 Aug 2021 06:51 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को बड़ी सियासी मुसीबतों ने घेर लिया है। हालत यह है कि अमेरिकी मीडिया के डेमोक्रेटिक पार्टी समर्थक हिस्सों में भी यह दो टूक कहा गया है कि बाइडन का हनीमून पीरियड अब खत्म हो गया है...
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन को बड़ी सियासी मुसीबतों ने घेर लिया है। हालत यह है कि अमेरिकी मीडिया के डेमोक्रेटिक पार्टी समर्थक हिस्सों में भी यह दो टूक कहा गया है कि बाइडन का हनीमून पीरियड अब खत्म हो गया है। अब उनके सामने कड़ी हकीकतें हैं।

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विश्लेषकों के मुताबिक फिलहाल जिन समस्याओं से बाइडन प्रशासन को जूझना पड़ रहा है, उनमें सबसे प्रमुख देश में तेजी से बढ़ रहा कोरोना संक्रमण है। सिर्फ तीन हफ्ते पहले अमेरिका में औसतन रोज 23 हजार नए मामले सामने आ रहे थे। अब ये औसत रोजाना 85 हजार तक पहुंच गया है। बाइडन ने सत्ता में आने के बाद एलान किया था कि अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस यानी चार जुलाई तक सभी अमेरिकियों का कोरोना टीकाकरण कर दिया जाएगा। लेकिन इस सोमवार को बाइडन प्रशासन ने बताया कि अमेरिका की 70 फीसदी आबादी ऐसी है, जिसे कम से कम टीके का एक डोज लग चुका है। टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल ना कर पाने को बाइडन प्रशासन की बड़ी नाकामी समझा जा रहा है।

इस बीच कोरोना महामारी के दौरान मकान किराया ना चुकाने वाले लोगों की बेदखली पर रोक बीते 31 जुलाई को खत्म हो चुकी है। इससे लाखों लोगों के सामने बेदखली का खतरा आ खड़ा हुआ है। इस मुद्दे पर डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व की मंशा पर खुद इसी पार्टी के नेताओं और सांसदों ने सवाल उठाए हैं। टीवी चैनल सीएनएन की वेबसाइट पर छपे एक विश्लेषण में कहा गया है- ‘इस मुद्दे ने राष्ट्रपति बाइडन और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं के बीच मौजूद विभाजन को बेनकाब कर दिया है।’
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उधर, अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर आव्रजक बच्चों की गिरफ्तारी बढ़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप के दौर में ऐसे बच्चों को गिरफ्तार करने को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी ने काफी हाय-तौबा मचाया था। बाइडन प्रशासन के दौर में भी यह जारी है, जिससे राष्ट्रपति बाइडन की छवि देश के प्रगतिशील तबकों के बीच खराब हुई है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज के एक छोटे हिस्से पर रिपब्लिकन पार्टी के साथ सहमति बनाने को शुरुआत में बाइडन प्रशासन की जीत बताया गया था। लेकिन उसके पारित होने में हो रही देरी ने इसे लेकर बने उत्साह में सेंध लगाई है। उधर डेमोक्रेटिक पार्टी का प्रोग्रेसिव खेमा इसे लेकर और खफा हुआ है। उसके कई नेताओं ने साफ कहा है कि अगर पूरा पैकेज सीनेट से पास नहीं होता है, तो वे हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में द्विपक्षीय सहमति वाले पैकेज भी पास नहीं होने देंगे।

इन घटनाओं से जो बाइडन की लोकप्रियता गिर रही है। अप्रैल में हुए यूनिवर्सिटी सर्वे में 54 फीसदी लोगों ने राष्ट्रपति के काम पर संतोष जताया था। जुलाई के आखिर में जारी उसी सर्वे के ताजा संस्करण में ये संख्या घट कर 48 फीसदी रह गई। सोमवार को जारी हुए गैलप एजेंसी के सर्वे में सिर्फ 40 फीसदी लोगों ने कहा कि देश में कोरोना महामारी की ठीक ढंग से संभाला जा रहा है। जबकि जून में आए गैलप सर्वे में ऐसी राय 89 फीसदी लोगों ने जताई थी।

इन कारणों से अब जो बाइडन के भविष्य और डेमोक्रेटिक पार्टी की अगली चुनावी संभावनाओं को लेकर संदेह जताए जाने लगे हैँ। विश्लेषकों ने कहा है कि जो बाइडन के लिए कितना जन समर्थन बना रहेगा, यह फैल रहे कोरोना संक्रमण को संभालने की उनकी क्षमता से तय होगा। अगर महामारी बढ़ी और फिर से आम जिंदगी ठप हुई, तो बाइडन की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।

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