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30,000 लोगों पर पहली बार वैक्सीन का सबसे बड़ा ट्रायल, डेढ़ लाख लोगों ने किया था रजिस्ट्रेशन

Tue, 28 Jul 2020 12:03 PM IST
Tanuja Yadav वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
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Vaccine Company Moderna - फोटो : Instagram
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कोरोना वैक्सीन का दुनिया का पहला और सबसे बड़ा ट्रायल सोमवार से शुरू हो गया है। अमेरिका की सरकारी संस्था नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) और फार्मा कंपनी मॉडेर्ना की ओर से तैयार वैक्सीन का दुनिया भर में सबसे बड़ा ट्रायल होगा जिसमें 30 हजार लोग शामिल होंगे।

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नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के डॉक्टर एंथनी फाउची का कहना है कि इसकी कोई गारंटी नहीं है कि जो वैक्सीन बनी है वह वायरस से बचाएगी। परीक्षण में शामिल कुछ लोगों को वैक्सीन की डोज दी जाएगी तो कुछ को सिर्फ डमी वैक्सीन लगेगी।

इसके बाद वैज्ञानिक पता करेंगे कि वह कौन से लोग हैं जो दैनिक काम करते हुए संक्रमण की चपेट में आए हैं। खासतौर से उन क्षेत्रों में जहां वायरस के प्रसार की जांच नहीं हुई है। इस परीक्षण के जरिए वैक्सीन का असर ही नहीं उसकी सुरक्षा को भी जांचा जाएगा।
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लोगों की रूचि विज्ञान के लिए अच्छा संकेत
सिएटल स्थित द फ्रेंड हचिसन कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट की वायरोलॉजिस्ट डॉ. लैरी कोरे का कहना है कि ट्रायल में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का शामिल होना विज्ञान के लिए अच्छा संकेत है। करीब डेढ़ लाख अमेरिकी लोगों ने परीक्षण में शामिल होने के लिए ऑनलाइन इच्छा जताई थी।

आमतौर पर वैक्सीन बनाने में काफी वक्त लगता है लेकिन वैज्ञानिकों ने कोरोना महामारी के बीच जिस गति से काम किया है वो रिकॉर्ड है।

एनआईएच ने 65 दिन में बनाई वैक्सीन
एनआईएच ने 65 दिन के अंदर ही वैक्सीन बनाई है। अब उसका मनुष्य पर ट्रायल होना है। परीक्षण में शामिल पहला व्यक्ति दूसरों को इसके लिए प्रोत्साहित करता है। पहले चरण में इसके नतीजे सकारात्मक थे। कुछ लोगों को बुखार, ठंडी लगने और दर्द की शिकायत थी। इस परीक्षण में अगर सब कुछ सही रहता है तो इसके नतीजे आने में कुछ महीने लगेंगे और दुनिया को राहत मिल सकती है।

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