बांग्लादेश में शेख हसीना वाजेद की सरकार पर असहमति को दबाने का आरोप गहराता जा रहा है। अब प्रधानमंत्री शेख हसीना की अपने पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबर रहमान की ‘भक्ति’ और मूलभूत मानव अधिकारों के बीच टकराव खड़ा होने के संकेत हैं। ताजा विवाद एक मेयर की गिरफ्तारी से भड़का है। मेयर ने शेख मुजीब के एक भित्ति-चित्र को स्थापित करने से इनकार कर दिया था। मेयर ने दलील दी थी कि भत्ति चित्र को लगाना इस्लामी मान्यताओं के खिलाफ है।
ताजा घटना पश्चिमी शहर राजशाही की है। वहां मेयर अब्बास अली पिछले महीने चर्चा में आए, जब शेख मुजीब के भित्ति चित्र के बारे में उनकी एक टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। उस ऑडियो क्लिप में अली को यह कहते सुना गया कि भित्ति चित्र को लगाना इस्लामी शरिया कानून के मुताबिक नहीं है। उन्होंने कहा- ‘इसीलिए मैं उसे नहीं स्वीकार करूंगा। मैं योजना के मुताबिक बाकी सभी चीजों का निर्माण करूंगा, लेकिन भित्ति चित्र लगाना मुझे मंजूर नहीं है।’
यही कहने के आरोप में अब्बास अली पर मुकदमा दर्ज किया गया। इस हफ्ते बुधवार को पुलिस ने ढाका के एक होटल से गिरफ्तार कर लिया। अली की टिप्पणी के खिलाफ देश के कई जगहों पर सत्ताधारी आवामी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। मामला भड़कते देख पहले अली ने खंडन किया कि उन्होंने यह बात कही थी। लेकिन बाद में एक फेसबुक पोस्ट में उन्होंने इसके लिए माफी मांग ली। तब से वे राजशाही से गायब थे।
अली की गिरफ्तारी से देश में विवाद भड़क उठा है। शेख हसीना सरकार पर असहमति को दबाने के आरोप लगाए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा है कि बांग्लादेश सरकार ने असहमति पर हमला बोल दिया है।