लंदन की वूलविच क्राउन कोर्ट ने आयरिश हिप-हॉप ग्रुप नीकैप के रैपर मो चारा पर लगे आतंकवाद से जुड़े आरोप को तकनीकी खामी के चलते खारिज कर दिया। उन पर पिछले साल कॉन्सर्ट में हिजबुल्ला का झंडा लहराने का आरोप था। अदालत ने इसे गैरकानूनी कार्यवाही बताया।
लंदन की वूलविच क्राउन कोर्ट ने आयरिश भाषा में गाने वाले हिप-हॉप ग्रुप नीकैप के सदस्य और रैपर मो चारापर लगे आतंकवाद से जुड़े आरोप को शुक्रवार को खारिज कर दिया। रैपर का असली नाम लियाम ओग ओ हनैधी है। इन पर आरोप था कि इन्होंने पिछले साल लंदन के एक कॉन्सर्ट में हिजबुल्ला का झंडा लहराया था, जिसे ब्रिटेन ने आतंकी संगठन घोषित किया है।
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नीकैप ग्रुप कई बार विवादों में रहा है। उस पर आरोप है कि वह अपने बयानों और प्रदर्शनों से हमास और हिजबुल्ला जैसे संगठनों की महिमा गान करता है। हंगरी और कनाडा पहले ही इस ग्रुप पर बैन लगा चुके हैं। वहीं, ब्रिटेन में भी इसकी गतिविधियां लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में हैं।
फलस्तीन मुद्दे पर बैंड का रुख
बैंड ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि आलोचक उन्हें चुप कराना चाहते हैं क्योंकि वे फलस्तीन के पक्ष में खुलकर आवाज उठाते हैं। उनका कहना है कि वे न तो हिज़बुल्ला और हमास का समर्थन करते हैं और न ही हिंसा का समर्थन करते हैं। उन्होंने अपने रुख को मानवीय मुद्दा बताया है, न कि राजनीतिक।
रैपर मो चारा का पक्ष
27 वर्षीय मो चारा ने अदालत में कहा कि यह मुकदमा पूरी तरह से राजनीतिक रूप से प्रेरित है। उनके अनुसार, यह उनके बैंड को दबाने और उनकी फलस्तीन समर्थक आवाज को रोकने की कोशिश है। उन्होंने जोर दिया कि उनका मकसद किसी भी तरह से आतंकी संगठनों को समर्थन देना नहीं है।
ब्रिटेन में राजनीतिक बहस
इस मामले ने ब्रिटेन में राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी हवा दी है। जहां कई लोग नीकैप को 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' का उदाहरण मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द के नाम पर इसके बयानों की कड़ी आलोचना भी हो रही है। इस फैसले के बाद यह बैंड एक बार फिर सुर्खियों में है।