अमेरिका में अब सरकार के निशाने पर आने वाली अगली कंपनी अमेजन हो सकती है। अमेजन दुनिया में ई-कॉमर्स की सबसे बड़ी कंपनी है। साथ ही वह अमेरिका में सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेल विक्रेता भी है। अमेजन पर आरोप है कि उसने बाजार पर अपने दबदबे का इस्तेमाल करते हुए व्यापारियों को उससे एक्सक्लूसिव डील करने पर मजबूर किया है। यानी उसने रिटेल विक्रेताओं पर ये शर्त थोपी है कि अगर वे अपनी चीज अमेजन प्लेटफॉर्म पर बेचना चाहते हैं, तो उन्हें दूसरे प्लेटफॉर्म्स से तौबा करनी होगी। ऐसे ही आरोप पर चीन में अलीबाबा कंपनी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।
अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की एक कमेटी ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि विक्रेताओं का शोषण करने के अमेजन के तौर-तरीके से प्रतिस्पर्धा संबंधी गंभीर चिंताएं खड़ी हुई हैँ। प्रतिनिधि सभा की न्यायपालिका कमेटी ने दावा किया है कि उसके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले व्यापारियों से अमेजन ने अत्यधिक फीस वसूला है। कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में थर्ड पार्टी विक्रेतओं ने अमेजन को फीस के रूप में 39.7 अरब डॉलर चुकाए। अमेजन ने उस वर्ष कुल 160 अरब डॉलर का कारोबार किया।
यानी कुल कारोबार का लगभग 25 फीसदी हिस्सा उसने विक्रेताओं से फीस के रूप में वसूला। इस रकम में कमीशन, शिपिंग फीस और अन्य थर्ड पार्टी सेवाओं के बदले ली गई रकम शामिल है। लेकिन इसमें थर्ड पार्टी विक्रेताओं का विज्ञापन पर हुआ खर्च शामिल नहीं है, जो कि एक बड़ी रकम होती है।
अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेजन पर ग्राहकों के डेटा का दुरुपयोग करने का भी आरोप है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने इसी वर्ष अपनी एक जांच के बाद बताया था कि अमेजन ने स्वतंत्र विक्रेताओं के डेटा का इस्तेमाल उनके प्रोडक्ट का प्रतिद्वंद्वी उत्पाद तैयार करने के लिए किया। गौरतलब है कि अमेजन कंपनी यह दावा करती रही है कि जब वह अपने उत्पाद तैयार कर उन्हें बेचती है, तो इसमें वह थर्ड पार्टी विक्रेताओं से प्राप्त सूचनाओं का इस्तेमाल नहीं करती। लेकिन वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया था कि कंपनी ने असल में ऐसा ही किया है।
चीन के विनियामकों ने अलीबाबा पर कार्रवाई की शुरुआत करते हुए कहा था कि ग्राहकों के डेटा का बाजार पर एकाधिकार रखने वाली कंपनियां अपने फायदे में इस्तेमाल करती हैं, जो बड़ी चिंता का विषय है। चीनी अधिकारियों के मुताबिक बड़ी कंपनियों का ये व्यवहार नए उद्यमियों के बाजार में आने की राह में बाधक बन सकता है।
पश्चिमी विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि चीन और अमेरिका के विनियामक एक जैसी समस्या पर एक जैसी कार्रवाई शुरू करें, ऐसा अक्सर नहीं होता है। लेकिन इंटरनेट रिटेलिंग के कारोबार ने दोनों देशों में एक जैसी समस्याएं खड़ी की हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अमेजन, गूगल, फेसबुक आदि जैसी कंपनियां ‘नेटवर्क इफेक्ट’ (व्यापक पहुंच) के कारण बड़े लाभ की स्थिति में हैं। अपनी इस स्थिति का फायदा उठाकर वे अपने संभावित प्रतिद्वंद्वियों को कुचलने की कोशिश कर रही हैं। ये समस्या यूरोप में भी महसूस की गई है, जहां अभी हाल ही में बड़ी टेक कंपनियों पर लगाम कसने की गंभीर पहल की गई है।