रूस इस साल 9 मई को द्वितीय विश्व युद्ध में नाजी जर्मनी पर जीत की 81वीं वर्षगांठ मनाएगा, लेकिन इस बार परंपरागत सैन्य शक्ति का प्रदर्शन काफी बदला हुआ नजर आएगा। रूसी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि राजधानी मॉस्को के रेड स्क्वायर में होने वाली विक्ट्री डे परेड में इस बार सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन नहीं होगा।
रक्षा मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि वर्तमान परिचालन स्थिति को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि, इसके पीछे के कारणों को विस्तार से स्पष्ट नहीं किया गया। परेड में इस बार विभिन्न सैन्य शैक्षणिक संस्थानों के कैडेट और सेना की कुछ शाखाओं के जवान शामिल होंगे, जबकि परंपरागत हवाई फ्लाईओवर जारी रहेगा।
विजय दिवस रूस का सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उत्सव माना जाता है। विश्व युद्ध द्वितीय में नाजी जर्मनी पर जीत को रूस ग्रेट पैट्रियॉटिक वॉर के रूप में याद करता है। इस युद्ध में सोवियत संघ के करीब 2.7 करोड़ लोगों की मौत हुई थी, जिसने देश की सामूहिक स्मृति पर गहरा असर छोड़ा है।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने लंबे शासनकाल में विजय दिवस को राष्ट्रीय गौरव और शक्ति प्रदर्शन का प्रमुख प्रतीक बना दिया है। साथ ही, वे इस ऐतिहासिक जीत के संदर्भ का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध को सही ठहराने के लिए भी करते रहे हैं।