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Pakistan General Elections: आम चुनाव की तारीख पर जारी है विवाद, पाकिस्तान में बनते-बनते बिगड़ गई बात?

Thu, 04 May 2023 04:53 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

बुधवार को पीटीआई ने 13 दलों के गठबंधन पीडीएम के साथ चुनाव के समय के बारे में हुई अपनी बातचीत का ब्योरा सुप्रीम कोर्ट को दिया। उसने बताया कि चुनाव की तारीख के बारे में सहमति नहीं बनी है, इसलिए पंजाब में चुनाव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप होना चाहिए...
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Pakistan election commission - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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ऐसा लगता है कि पाकिस्तान में चुनाव के समय को लेकर सत्ता पक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच बात फिर बिगड़ गई है। मंगलवार रात दोनों पक्षों ने कहा था कि नेशनल असेंबली और चारों प्रांतीय असेंबलियों के चुनाव साथ-साथ पर उनके बीच सहमति बन गई है। तब सिर्फ यह तय नहीं हो सका था कि ये चुनाव कब होंगे। लेकिन बुधवार को इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने मांग कर दी कि पंजाब में प्रांतीय चुनाव पहले से तय तारीख यानी 14 मई को कराए जाएं।

इस बीच पाकिस्तान के निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर उससे पंजाब के चुनाव के बारे में दिए गए आदेश को वापस लेने की गुजारिश की है। 14 मई को चुनाव कराने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने ही दिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया था कि अगर सत्ताधारी गठबंधन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) और पीटीआई पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने पर राजी हो जाएं, तो वह पंजाब में चुनाव के बारे में अपना आदेश वापस ले सकता है।

बुधवार को पीटीआई ने 13 दलों के गठबंधन पीडीएम के साथ चुनाव के समय के बारे में हुई अपनी बातचीत का ब्योरा सुप्रीम कोर्ट को दिया। उसने बताया कि चुनाव की तारीख के बारे में सहमति नहीं बनी है, इसलिए पंजाब में चुनाव पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुरूप होना चाहिए।

पीटीआई अध्यक्ष इमरान खान ने बुधवार को एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने समर्थकों से शनिवार को सड़कों पर उतर कर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल के प्रति समर्थन जताने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश में कानून के राज की रक्षा के लिए चीफ जस्टिस के साथ सभी लोगों को एकजुटता जाहिर करनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट में पेश अपनी रिपोर्ट में पीटीआई ने कहा कि कोर्ट के निर्देश के मुताबिक उसने पीडीएम के साथ बातचीत में चुनाव की तारीख पर सहमति बनाने की पूरी कोशिश की। लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। पीटीआई ने बताया कि उसने पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के बारे में सत्ता पक्ष के सामने कुछ शर्तें रखी हैं। उनमें यह शामिल है कि नेशनल असेंबली और सिंध एवं बलूचिस्तान की प्रांतीय असेंबलियों को तुरंत भंग किया जाए। इन सबके भंग होने के बाद 60 दिन के अंदर नेशनल असेंबली और चारों प्रांतीय असेंबलियों के चुनाव कराए जाएं। पंजाब और खैबर पख्तूनवा की प्रांतीय असेंबलियां पहले से ही भंग अवस्था में हैं।

पीटीआई के मुताबिक पीडीएम इस सुझाव पर सहमत नहीं हुआ। इसके बदले पीडीएम ने प्रस्ताव रखा कि नेशनल असेंबली और सिंध एवं बलूचिस्तान की प्रांतीय असेंबलियों को इस वर्ष 30 जुलाई को भंग किया जाए। उसके बाद 90 दिन के अंदर सभी चुनाव एक साथ कराए जाएं। पीटीआई को यह मंजूर नहीं है। इसलिए कोई समाधान नहीं निकल सका।

अपनी इस रिपोर्ट के आधार पीटीआई ने कोर्ट से गुजारिश की है कि वह 14 मई को पंजाब में चुनाव कराने के अपने आदेश पर कायम रहे। पार्टी ने कहा- ‘सुप्रीम कोर्ट के इससे संबंधित आदेश पर संविधान की भावना के तहत पालन होना चाहिए।’ पर्यवेक्षकों के मुताबिक पीटीआई की इस रिपोर्ट के बाद पाकिस्तान में सियासी तनाव वापस आ गया है। शनिवार को पीटीआई के विरोध प्रदर्शनों से टकराव का माहौल और गहरा जाएगा। 

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